कर्नाटक सरकार ने दीपावली के मौके पर कर्मचारियों के डीए में वृद्धि और किसानों को सूखा राहत की घोषणा की है। राज्य सरकार ने सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों का महंगाई भत्ता (डीए) 15.75 प्रतिशत से बढ़ाकर 18 प्रतिशत कर दिया है, जो 1 जुलाई, 2026 से लागू होगा। यह फैसला उपमुख्यमंत्री जी. परमेश्वर ने गुरुवार को बताया।
कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए डीए में वृद्धि
परमेश्वर ने बताया कि 2024 के संशोधित वेतनमान के तहत यह बढ़ोतरी जारी की गई है। अब कर्मचारियों का डीए मूल वेतन का 18 प्रतिशत होगा, जो इससे पहले 15.75 प्रतिशत था। यह लाभ राज्य के सभी सेवानिवृत्त कर्मचारियों और पारिवारिक पेंशनभोगियों पर भी लागू होगा।
उन्होंने कहा कि सरकारी कर्मचारी प्रशासन की रीढ़ हैं और जनसेवा में उनका योगदान महत्वपूर्ण है। सेवानिवृत्त कर्मचारियों का भी इस बदलाव के द्वारा सम्मान किया गया है, जिन्होंने कई वर्षों तक राज्य के विकास में कार्य किया है।
किसानों को सूखा राहत की किस्त
सरकार ने दीपावली के अवसर पर सूखा प्रभावित किसानों को सहायता के रूप में पहली किस्त जारी की है। इस योजना के तहत प्रति किसान 2,500 रुपए की पहली किश्त दी गई है। अगले कुछ दिनों में यह राशि 2,500 रुपए और जारी की जाएगी, जिससे कुल सहायता 5,000 रुपए होगी।
मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार और उपमुख्यमंत्री जी. परमेश्वर ने बेंगलुरु के विधानसौधा में इस राशि का वितरण शुरू किया। सरकार ने इनपुट सब्सिडी के पहले चरण के लिए 1,260 करोड़ रुपए जारी किए हैं, जो डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) के जरिए किसानों के खातों में भेजे जाएंगे।
शिवकुमार ने मीडिया से कहा कि 2 एकड़ तक की जमीन वाले किसानों को प्रति एकड़ 2,500 रुपए की सहायता दी जाएगी। उन्होंने बताया कि पहली किस्त के रूप में 2,500 रुपए जारी किए जा चुके हैं और बाकी भी जल्द ही प्रदान किए जाएंगे।
उन्होंने कहा, “आज उपमुख्यमंत्री और मैं 2,500 रुपए की पहली किस्त जारी करने का काम कर रहे हैं। अगले 15 दिनों में बाकी राशि भी किसानों को दे दी जाएगी।” उन्होंने यह भी कहा कि यह सहायता संकट के समय किसानों के लिए सहारा है, खासकर दीपावली के समय।
परमेश्वर ने बताया कि डीए में बढ़ोतरी सरकार की कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है। साथ ही, सरकार किसानों को आर्थिक रूप से समर्थन देने के लिए लगातार प्रयासरत है। उन्होंने कहा कि यह कदम सभी श्रेणियों के लिए सम्मान और आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करेगा।
सरकार का यह फैसला जीवन-यापन की बढ़ती लागत को ध्यान में रखते हुए लिया गया है ताकि सरकारी कर्मचारी, पेंशनभोगी और किसान आर्थिक रूप से समर्थित महसूस करें।
