बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने गुरुवार को स्पष्ट किया कि वह दिसंबर महीने में अपने देश वापस लौटेंगी। एक ईमेल इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि उन्हें मौत की सजा और गिरफ्तारी की संभावना के बावजूद भी वह वतन वापसी का फैसला नहीं बदलेंगी। वे अगस्त में पहली बार इस बात का ऐलान कर चुकी हैं और अब भी अपने इस फैसले पर अडिग हैं।
शेख हसीना का दृढ़ संकल्प
शेख हसीना ने कहा कि अगर उनकी मौत निश्चित है तो वे अपने देश की मिट्टी पर मरना पसंद करेंगी। उन्होंने भारत या अन्य देशों से कूटनीतिक सहायता लेने से इंकार किया है और बताया कि वे किसी विदेशी समर्थन के बिना ही बांग्लादेश लौटना चाहती हैं। वे पूरी तरह जानती हैं कि लौटने पर उनकी गिरफ्तारी, जेल या मौत तक हो सकती है, लेकिन वे अपने लोगों की तकलीफ को दूर से देख कर जीवन बिताना पसंद नहीं करेंगी।
2009 से अगस्त 2024 तक प्रधानमंत्री रह चुकीं हसीना अगस्त 2024 में बांग्लादेश से भाग गई थीं। इसके बाद बांग्लादेश के इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल ने उनकी गैरमौजूदगी में उन्हें मौत की सजा सुनाई। ट्रिब्यूनल ने प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई के मामले में मानवता के खिलाफ अपराध साबित किए। इस हिंसा में 1,400 लोगों के मारे जाने का अनुमान है।
राजनीतिक स्थिति और अवामी लीग
हसीना की पार्टी, आवामी लीग, पर प्रतिबंध लगा हुआ है। कई वरिष्ठ नेताओं को या तो गिरफ्तार कर लिया गया है या देश निकाला दिया गया है। फरवरी में चुनाव भी पार्टी को मैदान में उतरने से रोका गया था। इस बीच, नोबेल शांति पुरस्कार विजेता मुहम्मद यूनुस ने 18 महीनों तक अंतरिम सरकार चलाई, और फिर पिछले फरवरी में खालिदा जिया के बेटे तारिक रहमान की पार्टी ने चुनाव में जीत हासिल की।
शेख हसीना का आरोप है कि उनकी पार्टी के सदस्यों पर राजनीतिक दबाव और हिंसा जारी है। उनका कहना है कि अगस्त 2024 से अब तक लगभग 20,000 अवामी लीग समर्थक मारे जा चुके हैं, हजारों गिरफ्तार या प्रताड़ित हुए हैं। वे यह भी कहती हैं कि उनके समर्थकों ने अपने घर, व्यवसाय और आजीविका खो दी है।
हसीना ने बांग्लादेश में लोकतांत्रिक माहौल की कमी और अपने राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ सरकार की कार्रवाई को गंभीर बताया। उन्होंने इस बीच चरमपंथी समूहों के बढ़ते प्रभाव पर भी चिंता जताई, जिन्हें उन्होंने सत्ता में रहने के दौरान कड़ा जवाब दिया था।
उन्होंने यह भी बताया कि विभिन्न मानवाधिकार संगठनों ने हाल में बांग्लादेश में नागरिक और राजनीतिक अधिकारों के उल्लंघन की निंदा की है। उनका मानना है कि मौजूदा हालात चरमपंथी तत्वों को और ज़्यादा सक्रिय और आत्मविश्वासी बना रहे हैं।
भारत की सरकार ने बार-बार शेख हसीना के प्रत्यर्पण से इनकार किया है जबकि बांग्लादेश सरकार उन्हें वापस लाने की मांग करती रही है। हसीना ने कहा कि वे अपने देश की सेवा के लिए फिर से लौटेंगी, मौत भी हो तो वे अपने लोगों के बीच रहना पसंद करेंगी।
