D2D: ट्राई की नई सिफारिशें, अंतरिक्ष से मोबाइल सिग्नल भेजने का बड़ा कदम

टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (TRAI) ने भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सेवा को बढ़ावा देने के लिए नई सिफारिशें पेश की हैं। इन सिफारिशों के तहत मोबाइल डिवाइस को सीधे सैटेलाइट से कनेक्ट करने की व्यवस्था की जा सकेगी, जिसे डायरेक्ट-टू-डिवाइस (D2D) सेवा कहा जाता है। यह प्रस्ताव देश के दूरदराज इलाकों में बेहतर इंटरनेट पहुंचाने में मददगार होगा।

TRAI की नई सिफारिशों के मुख्य बिंदु

TRAI ने ‘टेलीकम्युनिकेशंस एक्ट, 2023’ के तहत सैटेलाइट नेटवर्क प्रोवाइडर्स के लिए एक नया ऑथराइजेशन फ्रेमवर्क लागू करने की सिफारिश की है। इसके तहत कंपनियां ‘सैटेलाइट कम्युनिकेशन नेटवर्क एज ए सर्विस’ (SCNaaS) प्रदान कर सकेंगी, जिसमें नेटवर्क इन्फ्रास्ट्रक्चर और सेवा दोनों अलग-अलग होंगे। इस व्यवस्था से कंपनियों को अपना सैटेलाइट नेटवर्क बनाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। वे पार्टनरशिप के जरिए सैटेलाइट संसाधनों का साझा उपयोग कर सकेंगी।

यह नया लाइसेंस पूरे भारत में लागू होगा और 20 वर्षों के लिए वैध होगा। इसके बाद इसे 20 साल और बढ़ाया जा सकेगा। इससे सैटेलाइट आधारित मोबाइल कनेक्टिविटी को विस्तार देने में मदद मिलेगी, विशेषकर उन क्षेत्रों में जहां पारम्परिक नेटवर्क पहुंचता नहीं है।

ग्राहकों के लिए लाभ

अगर ट्राई की सिफारिशें लागू होती हैं, तो मोबाइल फोन बिना किसी जमीनी टावर के सीधे सैटेलाइट से जुड़ सकेंगे। इससे पहाड़ी इलाकों, दूरदराज गांवों और अन्य सीमांत क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी। इसके अलावा, खराब मौसम या प्राकृतिक आपदा के दौरान जब मोबाइल नेटवर्क प्रभावित होता है, तब भी D2D कनेक्टिविटी लोगों को जुड़े रहने में मदद करेगी।

आगे जाकर, इस क्षमता का इस्तेमाल बेहतर इंटरनेट कनेक्टिविटी के लिए भी किया जा सकता है। अमेरिका जैसे देशों में इस दिशा में काम शुरू हो चुका है, जिससे भारत को इस क्षेत्र में विकास का अवसर मिलेगा।

ट्राई की सिफारिशों में यह भी कहा गया है कि सैटेलाइट नेटवर्क बनाने की बाध्यता नहीं होगी, जिससे कंपनियां अपने संसाधन साझा कर सकती हैं। उदाहरण के लिए, यदि रिलायंस जियो, एयरटेल या वीआई अपना सैटेलाइट लॉन्च न करें, तो वे किसी अन्य सैटेलाइट प्रोवाइडर के साथ साझेदारी कर ग्राहक तक अपनी सेवाएं पहुंचा सकेंगी।

यह पहल मुख्य रूप से उस समय आई है जब भारत में सैटेलाइट इंटरनेट के क्षेत्र में कई बड़ी कंपनियां जैसे एलन मस्क की स्टारलिंक, भारती के सहयोग वाली यूटेलसैट वनवेब, और रिलायंस जियो शामिल हैं। ये कंपनियां देश में सैटेलाइट इंटरनेट मार्केट विकसित करने की तैयारी कर रही हैं।

ट्राई ने फिलहाल केवल सिफारिशें प्रस्तुत की हैं, जिन्हें अभी सरकार से मंजूरी मिलनी बाकी है। अगर मंजूरी मिलती है, तो देश में मोबाइल इंटरनेट की गुणवत्ता और पहुंच दोनों में सुधार होने की संभावना है।

इस प्रकार, ट्राई की यह नई योजना भारत में डिजिटल कनेक्टिविटी के विस्तार में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है, जो दूरदराज के इलाकों में इंटरनेट सेवा का स्तर बढ़ाएगी और आपदा के समय संचार सेवा जारी रखने में सहायक होगी।

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