पंकज त्रिपाठी Exclusive: दिवाली पर मां के पकवान और दीयों की यादें

अभिनेता पंकज त्रिपाठी का दिवाली पर एक खास नजरिया है, जो उनकी सरल और जमीनी सोच को दर्शाता है। बिहार के एक छोटे से गांव में अपने बचपन से जुड़े उनके अनुभव आज भी उनके त्योहार मनाने के तरीके में झलकते हैं। इस दिवाली उन्होंने अपने परिवार के साथ बिताए पलों और त्योहार की असली भावना के बारे में खुलकर बताया।

परिवार संग दिवाली का महत्व

पंकज त्रिपाठी के लिए दिवाली का असली मतलब अपने परिवार के साथ खुशियां बांटना है। वे कहते हैं कि यह त्योहार केवल घर की सजावट या रोशनी तक सीमित नहीं है, बल्कि मन में सकारात्मकता जगाने और पुरानी यादों को ताज़ा करने का अवसर है। उनके अनुसार, चाहे जीवन में कितनी भी परेशानियां हों, उम्मीद का दीपक जलाए रखना जरूरी है।

उनका कहना है कि दिवाली पर तामझाम कम करके परिवार के साथ मिलकर खाना-पीना, बातचीत करना और पारंपरिक कपड़े पहनना त्योहार की सबसे बड़ी खुशी है। यही सरलता इस पर्व की सच्ची खूबसूरती है जो सभी रिश्तों को मजबूत बनाती है।

बचपन की यादें और दिवाली की परंपराएं

बिहार के गांव में उनकी दिवाली की तैयारियां कई दिनों पहले शुरू हो जाया करती थीं। घर की सफाई से लेकर मिट्टी के दीयों की सजावट और मिठाइयों का इंतजार, यह सब उनके बचपन की मिठास को दर्शाता है। वे बताते हैं कि तब साधन कम थे, लेकिन खुशियां बहुत बड़ी होती थीं।

माँ के बनाये पकवान दिवाली के आनंद का अहम हिस्सा थे। पूरा परिवार पूजा की तैयारी में जुटा रहता था और बचपन की छोटी-छोटी खुशियां आज भी याद आती हैं। पंकज त्रिपाठी को एहसास है कि उन दिनों की सादगी और परिवार के साथ बिताए हुए समय का कोई मुकाबला नहीं।

दिवाली के दौरान वे पार्टियों में ज्यादा रुचि नहीं रखते। उनकी प्राथमिकता परिवार के साथ त्योहार मनाना होता है। वे मानते हैं कि त्योहार की असली खुशी अपनों के बीच के छोटे-छोटे पलों में ही छिपी होती है, जो यादों में हमेशा बसी रहती है।

दिवाली की असली भावना है खुशी बांटना

पंकज त्रिपाठी कहते हैं कि किसी की मदद के लिए दिवाली का इंतज़ार करना जरूरी नहीं। अगर उनकी वजह से किसी के चेहरे पर मुस्कान आ जाए, तो यह उनके लिए सबसे बड़ी खुशी होती है। वे मानते हैं कि खुशी बांटने से खुशियां और बढ़ती हैं और यही दिवाली की सार्थकता है।

पटाखे छोड़कर दीयों से रोशनी जलाना उनका एक और मजबूत विचार है। वे पॉलीशन को गंभीर समस्या बताते हैं और पर्यावरण की सुरक्षा को जरूरी मानते हैं। उनका मानना है कि बिना पटाखों के भी दिवाली उतनी ही यादगार और खूबसूरत होती है।

अंत में वे सभी को दिवाली की शुभकामनाएं देते हुए कहते हैं कि इस बार सिर्फ घर नहीं, अपने मन को भी रोशन करें। मतभेदों को दूर करें, जरूरतमंदों की मदद करें और पर्यावरण का ध्यान रखें। अगर किसी के चेहरे पर मुस्कान लाना दिवाली का उद्देश्य हो, तो यही त्योहार का असली उत्सव होगा।

Source

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!