बांग्लादेश के खुलना में नोबेल पुरस्कार विजेता रवींद्रनाथ टैगोर की एक दीवार पर बनी तस्वीर पर काली स्याही पोत दी गई है। इसके साथ ही उनके खिलाफ नफरत फैलाने वाले पोस्टर भी लगाए गए, जिनमें कहा गया कि मुसलमानों और पूर्वी बंगाल के दुश्मन रहे टैगोर के लिए बांग्लादेश में कोई जगह नहीं। यह घटना अक्टूबर में हुई, जो ढाका में टैगोर की तस्वीर पर हमले के कुछ हफ्ते बाद है।
खुलना में सांस्कृतिक विरासत का हमला
खुलना रेलवे स्टेशन की सीमा दीवार पर बनी यह पेंटिंग उस क्षेत्र की कई प्रसिद्ध सांस्कृतिक हस्तियों में से एक थी। दीवार पर लोक गायक फकीर लालन शाह, पेंटर एसएम सुल्तान, कवि काजी नजरूल इस्लाम सहित कई अन्य हस्तियों की तस्वीरें भी थीं, जो सुरक्षित रहीं। इस कलाकारों की तस्वीरों के बीच टैगोर की पेंटिंग को निशाना बनाया गया।
खुलना सिटी कॉर्पोरेशन ने यह आर्टवर्क प्रधानमंत्री तारिक रहमान के शहर दौरे से पहले बनवाया था। दीवार पर बांग्लादेश के सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विषयों जैसे जुलाई विद्रोह, सुंदरबन और जूट उद्योग को भी दर्शाया गया था।
पोस्टरों में टैगोर और भारत के खिलाफ संदेश
टैगोर की तस्वीर के पास लगे पोस्टरों में उन्हें मुसलमानों और पूर्वी बंगाल का दुश्मन बताया गया है। पोस्टर पर लिखा था, “मुसलमानों और पूर्वी बंगाल के दुश्मन रहे टैगोर के लिए तीतूमीर के बंगाल में कोई जगह नहीं है। भारत की बड़ाई करने की कोई जगह नहीं है।” इस संदेश में टैगोर को बांग्लादेश में सम्मान दिए जाने का विरोध भी साफ झलकता है।
खुलना सदर पुलिस स्टेशन के ऑफिसर-इन-चार्ज लोकमान हुसैन ने बताया कि शुक्रवार दोपहर पेंटिंग को नुकसान पहुंचाए जाने की सूचना मिली, जिसके बाद जांच शुरू कर दी गई। उन्होंने यह भी कहा कि उस समय आसपास की सभी दुकानें बंद थीं, जिससे संदिग्धों की पहचान करना मुश्किल हो गया।
KCC के एडमिनिस्ट्रेटर नजरुल इस्लाम मंजू ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि इस तरह की हरकतें छोटी सोच का परिचायक हैं। उन्होंने बताया कि चित्र बच्चों और युवाओं में आजाद सोच को बढ़ावा देने के लिए बनाए गए थे।
कल्चरल एक्टिविस्ट शरीफुल इस्लाम सलीम ने इस हमले के पीछे संगठित समूह की संभावना जताई। उन्होंने कहा कि ढाका में भी इसी तरह की घटनाएं हुई हैं और भविष्य में अन्य प्रसिद्ध हस्तियों को भी निशाना बनाया जा सकता है।
“ये घटनाएं जानबूझकर की जा रही हैं। जिम्मेदारों की पहचान होनी चाहिए और उन्हें सजा मिलनी चाहिए। यह सिर्फ रवींद्रनाथ तक ही नहीं रुक सकता।”
सलीम ने आगे कहा कि टैगोर की सोच ने पीढ़ियों को सेक्युलरिज्म और इंसानों की इज्जत का पाठ पढ़ाया है। खुलना की घटना उस घटना के बाद आई है, जब ढाका में टैगोर की दीवार को भी निशाना बनाया गया था। पुलिस ने उस मामले में चार लोगों को गिरफ्तार किया था।
वहीं, बांग्लादेश में एक हिंदू महिला पर अमानवीय अत्याचार की भी खबर सामने आई है। राजधानी ढाका के मीरपुर इलाके में BNP समर्थित ग्रुप ने उस पर हमला और टॉर्चर का आरोप लगाया गया है। इस मामले में पुलिस जांच कर रही है।
मुख्य तथ्य
- खुलना में टैगोर की तस्वीर को काला स्याही पोता गया।
- पोस्टरों में टैगोर और भारत के खिलाफ नफरत फैलाने वाला संदेश लिखा था।
- पुलिस जांच कर रही है, लेकिन संदिग्धों की पहचान नहीं हो पाई।
- सांस्कृतिक कार्यकर्ताओं ने इस घटना की कड़ी निंदा की।
