अस्थमा मरीजों के लिए फ्लू खतरनाक, इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज

अस्थमा से पीड़ित लोगों के लिए फ्लू का संक्रमण गंभीर खतरा बना हुआ है। विशेषज्ञों का कहना है कि अस्थमा वाले मरीजों में जब फ्लू होता है, तब उनकी सांस की समस्याएं बढ़ सकती हैं और स्थिति गंभीर हो सकती है। फ्लू से अस्थमा का अटैक बढ़ने और निमोनिया जैसी जटिलताएं हो सकती हैं।

अस्थमा में फ्लू क्यों बढ़ाता है समस्या

सीडीसी (Centers for Disease Control and Prevention) के अनुसार, अस्थमा एक पुरानी श्वसन रोग है जिसमें फेफड़ों की नलियां संवेदनशील हो जाती हैं। वायरल संक्रमण जैसे फ्लू होने पर इन नलियों में सूजन और सिकुड़न बढ़ जाती है। इससे सांस लेने में दिक्कतें और खांसी, सांस फूलना जैसी समस्याएं बढ़ जाती हैं।

फ्लू नाक, गला और फेफड़ों पर असर करता है। अस्थमा वाले व्यक्ति के शरीर में वायरल संक्रमण से श्वसन तंत्र में सूजन हो जाती है। यह सूजन सांस की नलियों को और संकरी बना देती है। इस कारण खांसी, सीने में जकड़न और सांस लेने में दिक्कत होती है। कई बार इससे अस्थमा का गंभीर अटैक या निमोनिया भी हो सकता है।

फ्लू और अस्थमा के लक्षण और सावधानियां

अस्थमा और एलर्जी फाउंडेशन ऑफ अमेरिका के अनुसार अस्थमा मरीजों में फ्लू के सामान्य लक्षण जैसे बुखार, खांसी, गले में खराश और थकान हो सकते हैं। हालांकि, उन लोगों को सांस लेने में ज्यादा परेशानियां सामने आ सकती हैं। रात में बार-बार खांसी आना, सांस फूलना और सीने में जकड़न जैसी समस्याएं सामान्य लक्षणों से गंभीर हो सकती हैं।

उन्हें अपने सामान्य अस्थमा दवाओं की जरूरत बढ़ सकती है। फ्लू और अस्थमा दोनों एक साथ हो सकते हैं, इसलिए फ्लू के लक्षण आने पर समय पर डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।

क्लीवलैंड क्लीनिक और सीडीसी बताते हैं कि अस्थमा के सामान्य बढ़ने में सांस से जुड़ी दिक्कतें होती हैं, जबकि फ्लू एक वायरल संक्रमण है जिससे पूरे शरीर में लक्षण हो सकते हैं।

अस्थमा के संकेतों में खांसी या व्हीजिंग ज्यादा होना, सीने में जकड़न, सांस फूलना और रिलीवर इनहेलर की जरूरत बढ़ना शामिल है। फ्लू के दौरान बुखार, ठंड लगना, सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द और गले में खराश होते हैं। अस्थमा के मरीजों के लिए यह समझना जरूरी होता है कि कब संक्रमण गंभीर हो रहा है और कब अस्थमा बढ़ रहा है।

फ्लू के लक्षण दिखते ही अनदेखा न करें और डॉक्टर से संपर्क करें। निर्धारित दवाएं नियमित लें और वैक्सीनेशन पर भी ध्यान दें। अगर सांस लेने में बहुत दिक्कत हो या इनहेलर से राहत न मिले, तो तुरंत आपातकालीन सहायता लें।

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