नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक निवेशकों से भारत के ग्रीन एनर्जी क्षेत्र में निवेश करने की अपील की। उन्होंने कहा कि देश में राजनीतिक और नीतिगत स्थिरता के कारण निवेश के लिए बेहतरीन माहौल है। सरकार का लक्ष्य है कि दशक के अंत तक नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में 20 लाख करोड़ रुपये से अधिक निवेश के अवसर बनाए जाएं।
भारत की नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता में तेजी
पीएम मोदी ने सोमवार को ‘भारत नवीकरणीय ऊर्जा शिखर सम्मेलन एवं प्रदर्शनी 2026’ के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए बताया कि भारत अगले 10 से 11 वर्षों में लगभग 500 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता जोड़ने का लक्ष्य रखता है। उन्होंने भरोसा जताया कि यह लक्ष्य 2030 तक हासिल कर लिया जाएगा।
प्रधानमंत्री ने यह भी बताया कि देश ने पिछले दस वर्षों में नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण प्रगति की है, जो ऊर्जा संकट से निपटने में मददगार रही। उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया संकट के बावजूद भारत की आर्थिक वृद्धि मजबूत बनी हुई है।
निवेश अवसर और हरित ऊर्जा
पीएम मोदी ने कहा कि भारत सौर और नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में विश्व के शीर्ष तीन देशों में शामिल है। उन्होंने निवेशकों को बताया कि राजनीतिक स्थिरता और नीतिगत मदद के कारण यहां निवेश के विशाल अवसर उपलब्ध हैं। दशकों के अंत तक नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में 20 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा निवेश संभावना है।
उन्होंने सरकारी भवनों, स्कूलों, कॉलेजों, अस्पतालों और सड़कों को सौर ऊर्जा से जोड़ने की जरूरत पर जोर दिया। साथ ही देश में स्वदेशी ऊर्जा भंडारण समाधान विकसित करने और बैटरी भंडारण में नई क्षमता बनानी होगी।
पीएम मोदी ने हरित हाइड्रोजन मिशन का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि भारत ने हरित हाइड्रोजन में 50 लाख टन उत्पादन क्षमता का लक्ष्य रखा है और इस क्षेत्र में तेजी से प्रगति कर रहा है। उन्होंने हरित ऊर्जा गलियारे के बारे भी बताया, जो नवीकरणीय ऊर्जा से उत्पन्न बिजली को अन्य क्षेत्रों में पहुंचाएगा।
सरकार ने हरित ऊर्जा गलियारे के दूसरे चरण के लिए 2 लाख करोड़ रुपये का इंतजाम किया है। मोदी ने कहा कि ऊर्जा सुरक्षा का भविष्य स्वच्छ ऊर्जा में है। उन्होंने बताया कि अब तक 44,000 से अधिक सरकारी भवनों को सौर ऊर्जा से जोड़ा जा चुका है, जिससे सालाना लगभग 700 करोड़ रुपये की बचत हो रही है।
पीएम मोदी के अनुसार, नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में यह निवेश और विकास देश की ऊर्जा स्वतंत्रता और आर्थिक मजबूती दोनों के लिए अहम है। उन्होंने निवेशकों को इस क्षेत्र में भागीदारी के लिए आमंत्रित किया, ताकि भारत विश्व के सबसे बड़े स्वच्छ ऊर्जा बाजारों में से एक बन सके।
इस प्रकार, भारत ग्रीन एनर्जी में बड़े पैमाने पर निवेश को प्रोत्साहित कर अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के साथ-साथ वैश्विक पर्यावरण लक्ष्य भी हासिल करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
