सर्वम एआई के को-फाउंडर और उद्यमी विवेक राघवन ने भारत को लेकर गंभीर चेतावनी दी है कि यदि देश अपनी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) क्षमताओं को विकसित नहीं करता है, तो भारत जल्द ही एक डिजिटल उपनिवेश बन सकता है। उन्होंने विदेशी तकनीकी कंपनियों पर बढ़ती निर्भरता को चुनौती बताया और कहा कि फ्री AI यूजर्स का डेटा असल में एक मूल्यवान प्रोडक्ट है।
भारत का AI बुनियादी ढांचे को मजबूत करना आवश्यक
बेंगलुरु स्थित स्टार्टअप सर्वम एआई के सह-संस्थापक विवेक राघवन ने फाइनेंशियल टाइम्स से बातचीत में कहा कि भारत को अपने AI बुनियादी ढांचे को विकसित करना होगा ताकि देश इस तकनीक पर अपना नियंत्रण बनाए रख सके। उनका मानना है कि भारत बदलाव की प्रक्रिया में सबसे आगे है और भविष्य में देश में 100 से अधिक ऐसे स्टार्टअप्स उभरेंगे जो AI क्षेत्र में काम करेंगे।
राघवन ने दुनिया में बढ़ती विदेशी टेक कंपनियों की फ्री AI सर्विसेज को एक बड़ी चुनौती बताया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि फ्री में AI सेवाएं प्रदान करने वाली कंपनियां भारतीय कंपनियों के लिए प्रतिस्पर्धा बनाए रखना मुश्किल कर रही हैं। उन्होंने कहा कि अगर कोई कंपनी 100 अरब डॉलर का निवेश करके AI सेवाएं मुफ्त में दूसरों को देती है, तो इसे तकनीकी डंपिंग कहा जाएगा।
यूजर डेटा: फ्री AI के पीछे छुपा व्यापार
यूजर डेटा की सुरक्षा को लेकर भी विवेक राघवन ने चिंता जताई है। उन्होंने बताया कि भारत जैसे बड़े देश के लिए चैटजीपीटी और जेमिनी जैसे AI टूल्स के फ्री संस्करण का एक बड़ा बाजार है। लेकिन ऐसे फ्री उपयोगकर्ताओं का डेटा वास्तव में एक प्रोडक्ट है जो विदेशी कंपनियां अपने फायदे के लिए इस्तेमाल करती हैं।
राघवन ने कहा कि भारत को पूरी तरह से विदेशी AI कंपनियों पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। इसके लिए देश को अपना AI सिस्टम बनाना और उसे चलाने की क्षमता बढ़ानी होगी। यह कदम देश की डिजिटल सुरक्षा और तकनीकी आत्मनिर्भरता के लिए जरूरी है।
यह कोई पहला अवसर नहीं है जब इस तरह की बात सामने आई हो। जोहो फाउंडर श्रीधर वेम्बु भी कई बार इस विषय पर अपने विचार प्रकट कर चुके हैं। विशेष रूप से, सर्वम AI ऐसे नए और स्वदेशी AI मॉडलों का विकास कर रहा है जो भारत को AI तकनीक में आत्मनिर्भर बनने में मदद करेंगे।
इस चेतावनी के पीछे यह कदम भारत के डिजिटल भविष्य को सुरक्षित करने की महत्ता को रेखांकित करता है। विदेशी टेक्नोलॉजी पर बढ़ती निर्भरता से भारत के लिए खतरे बढ़ सकते हैं, इसलिए AI के क्षेत्र में निवेश और विकास पर जोर देने की आवश्यकता है।
विवेक राघवन का स्पष्ट कहना है कि भारत को डिजिटल स्वायत्तता की ओर कदम बढ़ाना चाहिए ताकि देश तकनीकी उपनिवेश बनने से बच सके और वैश्विक AI प्रतिस्पर्धा में मजबूत स्थिति बना सके। इस क्षेत्र में सरकार, उद्योग और स्टार्टअप्स के बीच बेहतर तालमेल की भी जरूरत होगी।
