दुनिया के 6 देशों में भारतीय कामगारों की मांग और रोजगार के अवसर

केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने हाल ही में बताया कि जर्मनी को हर साल कम से कम 90 हजार भारतीय कर्मचारियों की आवश्यकता होती है। इसके संदर्भ में यह सवाल उठता है कि क्या अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, रूस, UAE और सऊदी अरब में भी भारतीय कामगारों के लिए रोजगार के पर्याप्त मौके हैं। इन देशों में कुल कितनी नौकरियां उपलब्ध हैं और भारतीयों की स्थिति क्या है, इसकी जानकारी महत्वपूर्ण है।

अमेरिका और ब्रिटेन में नौकरियों की स्थिति

भारत सरकार के नीति आयोग की रिपोर्ट के अनुसार, 5 फरवरी 2025 तक अमेरिका में लगभग 72 लाख नौकरियां खाली थीं, वहीं ब्रिटेन में 8 लाख पद थे। अमेरिकी श्रम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, अगस्त 2026 में अमेरिका में करीब 71 लाख पद रिक्त थे। H-1B वीजा के जरिए विशेषज्ञ क्षेत्रों जैसे तकनीक, इंजीनियरिंग और स्वास्थ्य में भारतीयों को अवसर मिलते हैं। अमेरिकी नागरिकता और आव्रजन सेवा ने बताया कि वित्त वर्ष 2024 में H-1B वीजा की 71% याचिकाएं भारतीयों द्वारा दी गईं।

ब्रिटेन में मई से जुलाई 2026 के बीच करीब 7.07 लाख नौकरियां खाली पाई गईं, जिसमें स्वास्थ्य सेवा, सामाजिक देखभाल और शिक्षा के क्षेत्र प्रमुख हैं। दिसंबर 2025 तक ब्रिटेन में भारतीयों के नाम पर 10.29 लाख नौकरियां दर्ज थीं, जो किसी विदेशी समूह में सबसे बड़ी संख्या है। पिछले एक साल में उनकी नौकरियों में 54,200 की वृद्धि हुई।

कनाडा, रूस और खाड़ी देश

कनाडा ने 2026 में अस्थायी विदेशी कामगारों के लिए 2.30 लाख का लक्ष्य रखा है, जिसमें 1.70 लाख इंटरनेशनल मोबिलिटी प्रोग्राम और 60 हजार टेम्पररी फॉरेन वर्कर प्रोग्राम के तहत आते हैं। स्वास्थ्य, निर्माण और तकनीकी क्षेत्र में इनके पद खाली हैं।

रूस में भी भारतीय कामगारों की मांग बढ़ रही है। 3 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बताया कि इस वर्ष रूस ने 70 हजार भारतीय कुशल कामगारों को नियुक्त करने पर सहमति दी है। निर्माण और लॉजिस्टिक्स उद्योग यहां प्रमुख क्षेत्र हैं। जनवरी 2026 में एक रिपोर्ट में 40 हजार भारतीय कामगारों के रूस जाने की उम्मीद जताई गई थी।

खाड़ी देशों में भी रोजगार के बड़े अवसर हैं। UAE में 2025 में 2,00,686 भारतीय कामगारों को इमिग्रेशन क्लीयरेंस मिली, और मार्च 2026 तक वहां करीब 43.26 लाख भारतीय रह रहे थे। निर्माण, होटल, परिवहन और तकनीकी क्षेत्रों में यहां अवसर उपलब्ध हैं। वहीं, सऊदी अरब में 2025 में 1,36,812 भारतीयों को इमिग्रेशन क्लीयरेंस मिला और मार्च 2026 तक 27.48 लाख भारतीय वहां थे। सऊदी अरब में यह विदेशी कामगार कुल कार्यबल का लगभग 77% हैं।

भारत के लिए महत्व और निष्कर्ष

इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि विभिन्न देशों में भारतीय कामगारों के लिए क्षेत्र और अवसर अलग-अलग हैं। अमेरिका और ब्रिटेन में तकनीकी और स्वास्थ्य सेवाओं का महत्व अधिक है, जबकि रूस में निर्माण और लॉजिस्टिक्स पर जोर है। UAE और सऊदी अरब में सेवा, निर्माण और परिवहन जैसे क्षेत्रों में रोजगार के अवसर प्रमुख हैं।

विदेश मंत्रालय के अनुसार, इमिग्रेशन क्लीयरेंस उन भारतीय कामगारों के लिए ज़रूरी होती है जिन्हें विदेश जाने से पहले अनुमति की आवश्यकता होती है, इसलिए ये आंकड़े सभी भर्ती को नहीं दर्शाते। भारतीय कामगारों के लिए यह वैश्विक अवसर बड़े पैमाने पर रोजगार प्रदान करते हैं।

मुख्य तथ्य

  • जर्मनी को प्रति वर्ष 90 हजार भारतीय कर्मचारियों की आवश्यकता।
  • अमेरिका में 71 लाख से अधिक खाली नौकरियां, 71% H-1B वीजा आवेदन भारतीयों के।
  • ब्रिटेन में 10.29 लाख भारतीयों के नाम पर नौकरियां।
  • रूस ने 70 हजार भारतीय कुशल कामगारों की सहमति दी।
  • UAE और सऊदी अरब में लाखों भारतीय रोजगार के लिए इमिग्रेशन क्लीयरेंस प्राप्त।

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