अमेरिका में नौकरी के आधार पर मिलने वाले ग्रीन कार्ड के नियमों में बड़े बदलाव की तैयारियां चल रही हैं। ऑफिस ऑफ मैनेजमेंट एंड बजट (OMB) ने PERM प्रोग्राम के नए प्रस्ताव को फेडरल रिव्यू में मंजूरी दे दी है। इस फैसले के बाद नियमों को फेडरल रजिस्टर में प्रकाशित कर जनता की राय ली जाएगी।
PERM नियमों में प्रस्तावित बदलाव
लेबर डिपार्टमेंट ने PERM यानि परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन प्रोग्राम में सुधार का मसौदा तैयार किया है। PERM प्रक्रिया के तहत विदेशी वर्कर्स को ग्रीन कार्ड स्पॉन्सर करने से पहले कंपनियों को यह साबित करना आवश्यक होता है कि उस नौकरी के लिए अमेरिका में कोई सक्षम वर्कर नहीं है। यह प्रक्रिया खासकर EB-2 और EB-3 कैटेगरी के लिए जरूरी है, जिसमें अधिकांश भारतीय आते हैं।
प्रस्तावित बदलाव अमेरिकी कर्मचारियों की हायरिंग प्रक्रिया को कड़ा करने की दिशा में हैं। कंपनियों को अब अमेरिकी कर्मचारियों की भर्ती में गैर-भेदभाव नियमों का और सख्ती से पालन करना होगा। इसके अलावा, छंटनी से जुड़े मामलों में भी नियमों को मजबूत बनाया जाएगा ताकि अमेरिकी कर्मचारियों के हित सुरक्षित हो सकें।
नए नियमों के मुख्य फोकस क्षेत्र
लेबर डिपार्टमेंट ने बताया है कि नए नियम तीन मुख्य क्षेत्रों पर आधारित होंगे। पहला, हायरिंग प्रक्रिया में शर्तों का संशोधन ताकि योग्य अमेरिकी वर्कर्स को प्राथमिकता मिल सके। दूसरा, अमेरिकी कर्मचारियों की छंटनी के मामलों में सुधार। तीसरा, भर्ती प्रक्रिया में गैर-भेदभाव नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करना। ये बदलाव PERM प्रोग्राम में 2005 के बाद पहला महत्वपूर्ण सुधार होंगे।
नए PERM नियमों के तहत कंपनियों को यह साबित करना होगा कि वे नौकरी के लिए अमेरिकी उम्मीदवारों की भर्ती के लिए आवश्यक प्रयास कर रही हैं, और कहीं कोई भेदभाव नहीं हो रहा है। यह भारतीय वर्कर्स के लिए खास चिंताजनक है क्योंकि इस प्रक्रिया के बाद उनकी ग्रीन कार्ड की ट्रैवलिंग और प्रोसेसिंग में देरी हो सकती है।
नियम लागू करने की प्रक्रिया
फेडरल रजिस्टर में जब प्रस्तावित नियम प्रकाशित होंगे, तब लेबर डिपार्टमेंट कम से कम 30 से 60 दिनों तक इस पर सार्वजनिक सुझाव प्राप्त करेगा। इस दौरान कंपनियां, इमिग्रेशन वकील और अन्य हितधारक अपनी प्रतिक्रिया दे पाएंगे। विभाग इन सभी टिप्पणियों पर विचार के बाद नियम के अंतिम रूप पर फैसला करेगा। नियम केवल तभी लागू होंगे जब उन्हें अंतिम रूप दिया जाएगा और पब्लिश किया जाएगा।
भारतीय श्रमिक जो अमेरिका में परमानेंट रेजिडेंसी के लिए प्रयासरत हैं, उनके लिए यह बदलाव महत्वपूर्ण होंगे क्योंकि इससे उनकी ग्रीन कार्ड प्रक्रिया में नई शर्तें और औपचारिकताएं जुड़ सकती हैं। PERM प्रक्रिया में यह सुधार अमेरिकी रोजगार के बोझ को कम करने और स्थानीय श्रमिकों को प्राथमिकता देने के उद्देश्य से किए जा रहे हैं।
इस बदलते माहौल में भारतीय वर्कर्स को अपने वीज़ा और ग्रीन कार्ड के मामलों को लेकर सतर्क रहना जरूरी है। लेबर डिपार्टमेंट के नए नियमों से जुड़े बदलाव उनके अमेरिका में रहने के सपने को प्रभावित कर सकते हैं। अब देखना होगा कि फीडबैक के बाद अंतिम नियम कैसे आकार लेता है और इसका क्या प्रभाव पड़ेगा।
