अमेरिका के लास वेगास शहर में भारतीय गैंगस्टर हिमांशु भाऊ और नीरज फरीदपुरिया अपनी भव्य जीवनशैली के लिए मशहूर हुए। यह शहर अपनी आलीशान होटलों, महंगे कैसीनो और धूमधाम भरी नाइटलाइफ के कारण गैंगस्टर गतिविधियों का केन्द्र बन गया। दोनों गैंगस्टर लंबे समय से यहां अपने अपराध के मामलों को अंजाम देते रहे।
अपराध की दुनिया में युवाओं को लुभाने की रणनीति
पुलिस के अनुसार, गैंगस्टर युवाओं को अपराध की ओर आकर्षित करने के लिए विदेशों में लग्जरी जीवनशैली का आकर्षण दिखाते थे। इस रणनीति से वे युवाओं को अपने साथ जोड़ने में सफल रहे। राजौरी गार्डन के बर्गर किंग हत्याकांड की आरोपी अनु को भी इस तरह का लालच देकर अपराध के रास्ते पर लाया गया था।
ऐशो-आराम और महंगे शौक दिखाने से युवाओं के मन में यह सोच डाल दी जाती थी कि अपराध से ही उन्हें आरामदायक जिंदगी मिलेगी। पुलिस सूत्रों ने बताया कि ऐसे सपनों को दिखाकर गैंगsters ने युवाओं को अपने जाल में फंसाया।
हवाले के जरिए भेजे जाते थे रंगदारी के पैसे
हिमांशु भाऊ और नीरज फरीदपुरिया की गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने उनके आर्थिक नेटवर्क पर विशेष ध्यान दिया है। रंगदारी से मिले पैसे हवाले के माध्यम से विदेश भेजे जाते थे। पुलिस इस हवाला नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों की पहचान करने की कोशिश कर रही है।
वित्तीय जांच से गैंग के सहयोगियों और पैसों के लेन-देन के बारे में नई जानकारी सामने आ सकती है। इससे यह भी पता चलेगा कि गैंग ने अपने आर्थिक तंत्र को कैसे संचालित किया।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि हवाला नेटवर्क की पड़ताल से इनके अपराधिक कारोबार की अंतर्निहित आर्थिक संरचना का पता चलेगा। इससे अगले क़दम उठाने में मदद मिलेगी।
हिमांशु भाऊ गैंग की गतिविधियों में विदेशी देशों के साथ पैसों के लेन-देन को समझना पुलिस के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। जांच एजेंसियां इस जाल को तोड़ने की कोशिश कर रही हैं ताकि पूरी गैंग का कतरा फसाया जा सके।
इस पूरे मामले में यह साफ हो गया है कि गैंगस्टर अपनी चमक-दमक भरी जिंदगी के जरिए अन्य लोगों को भी जुड़ने के लिए प्रोत्साहित करते थे। इस अफसरों के लिए जोखिम बढ़ाता था क्योंकि नए लोग जुड़ने से अपराध जाल मजबूत होता था।
