चीन ने अपने गोल्ड रिजर्व को सितंबर 2026 में 2,410 टन तक बढ़ा दिया है। पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना ने सितंबर में अकेले 23 टन सोना खरीदा, जो अक्टूबर 2023 के बाद सबसे बड़ी मासिक खरीदारी है। विश्व गोल्ड काउंसिल के आंकड़ों के अनुसार, चीन 23 महीने से लगातार अपना गोल्ड रिजर्व बढ़ा रहा है और इस साल जनवरी से सितंबर तक कुल 103 टन सोना जोड़ा है।
चीन की सोना खरीदारी में लगातार बढ़ोतरी
WGC द्वारा जारी आंकड़ों में बताया गया है कि जुलाई से सितंबर की तिमाही में पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना ने 63 टन सोना खरीदा। यह तिमाही 2023 की तीसरी तिमाही के बाद सबसे बड़ी खरीद रही। चीन के कुल विदेशी मुद्रा भंडार में सोने की हिस्सेदारी 8.5 प्रतिशत है। हालांकि, सितंबर में कुल विदेशी मुद्रा भंडार लगभग 2% घटकर करीब 3.8 ट्रिलियन डॉलर रह गया, जो विदेशी मुद्रा संपत्तियों की कीमतों में गिरावट के कारण हुआ।
चीन ने तब सोना खरीदा जब डॉलर्स में LBMA गोल्ड की कीमतों में 8.5% और युआन में शंघाई गोल्ड प्राइस में 5.5% की गिरावट आई थी। इस गिरावट के पीछे अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड की बढ़ती रिटर्न दर, अमेरिकी फेडरल रिजर्व की कठोर नीति और मजबूत डॉलर को माना जाता है। बावजूद इसके, सोने की कीमतों में पूरी तिमाही में हल्की बढ़ोतरी देखी गई। अक्टूबर के शुरुआत में कीमतें स्थिर रहीं और अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना औसतन 4,100 डॉलर प्रति औंस के ऊपर रहा।
डॉलर पर निर्भरता घटाने की रणनीति
विश्लेषकों के अनुसार, चीन अमेरिकी डॉलर पर अपनी निर्भरता कम कर विदेशी मुद्रा भंडार को सुरक्षित रखने की रणनीति अपना रहा है। मनी मेटल्स एक्सचेंज के एनालिस्ट माइक माहरे ने कहा कि सोना ऐसी संपत्ति है, जो अन्य देशों की सरकारों की देनदारी नहीं होती। डॉलर में रखी संपत्तियों की कीमत उन देशों के वित्तीय सिस्टम पर निर्भर करती है, जबकि सोने के साथ यह जोखिम नहीं जुड़ा होता।
चीन की रणनीति के पीछे दो बड़ी आर्थिक चिंताएं हैं। पहला अमेरिका का लगातार बढ़ता कर्ज। अमेरिका अपनी खर्चीली नीतियों के लिए कर्ज पर निर्भर है, और डॉलर की ग्लोबल करेंसी का दर्जा उसे बजट घाटे को प्रबंधित करने में मदद करता है। लेकिन यदि वैश्विक निवेशक और सरकारें डॉलर और अमेरिकी बॉन्ड्स रखने में रुचि कम करें, तो इस पर दबाव बढ़ सकता है।
चीन हांगकांग को भी गोल्ड ट्रेडिंग और पेमेंट सेटलमेंट का एक महत्वपूर्ण वैश्विक केंद्र बनाने की कोशिश कर रहा है। इसके लिए सोना रखने की क्षमता बढ़ाई जा रही है और युआन में फ्यूचर्स ट्रेडिंग सिस्टम विकसित किया जा रहा है। अगर अंतरराष्ट्रीय सोना ट्रेडिंग में डॉलर की जगह युआन का उपयोग बढ़ता है, तो यह चीन की वैश्विक मुद्रा भूमिका मजबूत कर सकता है।
चीन में सोने की मांग केवल सरकारी नहीं है। WGC के मुताबिक, सितंबर में चीनी गोल्ड ETF में 11 टन सोना जुड़ा। यह लगातार तीसरा महीना था जिसमें ETF होल्डिंग बढ़ी। कुल होल्डिंग 304 टन के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई। तीसरी तिमाही में ETF में लगभग 3.9 अरब डॉलर का निवेश आया। सोने की बढ़ती मांग में स्थानीय शेयर बाजार के उतार-चढ़ाव और सरकारी बॉन्ड पर कम रिटर्न की वजह भी महत्वपूर्ण रही।
हालांकि, थोक सोने की मांग में कमी आई है। तीसरी तिमाही में थोक मांग 234 टन रही, जो पिछले साल की समान तिमाही से 21% कम है और पिछले दस सालों के औसत से 44% नीचे है। सोने के गहनों की मांग कमजोर बनी हुई है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि डॉलर का दबदबा अचानक खत्म होना मुश्किल है। डॉलर अभी भी वैश्विक व्यापार और वित्त में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। लेकिन विदेशी मुद्रा भंडार को विविध संपत्तियों में निवेश करने की प्रवृत्ति जारी रही, तो लंबे समय में डॉलर आधारित संपत्तियों की विदेशी मांग कम हो सकती है। चीन की सोना खरीदने की रणनीति इस बहस को और तेज कर रही है कि भविष्य में वैश्विक वित्तीय प्रणाली कैसी होगी और क्या सोना अमेरिका डॉलर पर निर्भरता को कम कर सकता है।
