मुंबई में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी-एसपी) के राष्ट्रीय प्रवक्ता नसीम सिद्दीकी ने भाजपा सरकार पर विरोध प्रदर्शनों को कमजोर करने की नीयत से काम करने का आरोप लगाया है। उन्होंने मतदाता सूची के पुनः पुनरीक्षण, परिसीमन, महिला आरक्षण और सरकार बदलने संबंधी बयानबाज़ी पर सवाल उठाए। उन्होंने हिदायत दी कि ये विरोध प्रदर्शन लोकतांत्रिक अधिकार हैं और जब तक मांगें पूरी नहीं होतीं, आंदोलन जारी रहेगा।
मतदाता सूची संशोधन पर सवाल
सिद्दीकी ने मतदाता सूची के गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) और एसएसआर प्रक्रिया को लेकर गंभीर चिंता जताई। उनका आरोप था कि भारी संख्या में लोगों के नाम हटाकर उन्हें मतदान का अधिकार लुप्त किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि पहले 13 करोड़ नाम हटाए गए, जबकि बाद में तीन करोड़ नए नाम जोड़े गए, जिसे उपलब्धि बताकर पेश किया जा रहा है।
सिद्दीकी ने इस प्रक्रिया की तुलना महंगाई बढ़ने के बाद मिलने वाली छूट से की। उनका कहना था कि सरकार पहले लोगों को नुकसान पहुंचाती है, फिर थोड़ी राहत देने का ढोंग करती है। उन्होंने भारत में मतदाता नाम कटौती की मुहिम को दुर्भाग्यपूर्ण बताया, जबकि विश्व के कई देशों में नए मतदाताओं को जोड़ने का अभियान चलता है।
सरकार पर प्रदर्शन दबाने का आरोप
व्यापारियों को नुकसान के सवाल पर सिद्दीकी ने कहा कि यह बहाना प्रदर्शन को कमजोर करने के लिए बनाया गया है। उन्होंने अन्ना हजारे के आंदोलन का उदाहरण देते हुए बताया कि उस समय भी दिल्ली में विरोध हुए, लेकिन व्यापारियों के नुकसान को मुद्दा नहीं बनाया गया था। उनका दावा था कि व्यापारी वर्ग का बड़ा हिस्सा भाजपा समर्थक है और सरकार इस बहाने से आंदोलन को रोकना चाहती है।
प्रदर्शन के दौरान गिरफ्तारियों पर उन्होंने कहा कि चाहे सरकार कितनी भी गिरफ्तारियां करे, लोग जेल से बाहर निकलकर आंदोलन जारी रखेंगे। उन्होंने कहा कि ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पूरी न होने तक आंदोलन जारी रहेगा। सिद्दीकी ने यह भी कहा कि प्रदर्शन में भाग लेने वाले कई लोगों को ट्रेनों, बसों, और रास्तों में रोका गया, तब भी अलग-अलग स्थानों पर विरोध प्रदर्शन सफलतापूर्वक हुए।
मुंबई के आजाद मैदान में अनुमति लेकर हुए प्रदर्शन का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि मुंबई ऐतिहासिक आंदोलन का केंद्र रहा है। उन्होंने 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन का हवाला देते हुए बताया कि एक प्रदर्शन से पूरे संघर्ष का नतीजा तय नहीं होता।
राजनाथ सिंह और एकनाथ शिंदे द्वारा दिए गए बयानों पर सिद्दीकी ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि भाजपा के लोग विरोध प्रदर्शनों को अराजकता बता रहे हैं, जो संविधान और देश के नागरिकों का अपमान है। शिंदे के बयान पर उन्होंने निराशा जताई और राजनाथ सिंह के कथन को ‘तख्तापलट’ कहना गलत बताया। उनका कहना था कि सत्ता परिवर्तन लोकतंत्र के वोट से तय होता है।
परिसीमन के संदर्भ में भी सिद्दीकी ने भाजपा पर दक्षिण भारत की राजनीतिक स्थिति कमजोर होने के कारण उसकी सीटें कम करके उत्तर भारत की सीटें बढ़ाने की कोशिश करने का आरोप लगाया। इसे लेकर विरोध हो रहा है।
महिला आरक्षण को लेकर उन्होंने कहा कि इसे लागू होना चाहिए और भाजपा को इस पर पूरा श्रेय नहीं लेना चाहिए क्योंकि यह सर्वसम्मति से हुआ था। उन्होंने 33 प्रतिशत महिला आरक्षण में ओबीसी और मुस्लिम महिलाओं के लिए भी आरक्षण की मांग की। सिद्दीकी ने दावा किया कि 2029 में इंडिया गठबंधन को नुकसान नहीं होगा, बल्कि भाजपा को नुकसान उठाना पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि विरोध प्रदर्शन और जनता की नाराजगी का असर भविष्य में दिखाई देगा।
