बचपन से हुनर की पाठशाला: चीन का कौशल मॉडल बना भारत के लिए सबक, 63 विधाओं में भारत की दमदार भागीदारी

शंघाई, चीन

शंघाई में चल रही वर्ल्ड स्किल्स प्रतियोगिता 2026 केवल दुनिया के बेहतरीन तकनीकी कौशल को देखने का मंच नहीं है, बल्कि अलग-अलग देशों की कौशल शिक्षा व्यवस्था को समझने का अवसर भी दे रही है। प्रतियोगिता में भाग लेने पहुंचा भारतीय दल चीन के उस मॉडल का अध्ययन कर रहा है, जिसमें बच्चों को प्राथमिक स्तर से ही व्यावहारिक और व्यावसायिक कौशल से जोड़ा जाता है।

चीन पिछले चार वर्ल्ड स्किल्स आयोजनों से पदक तालिका में शीर्ष पर रहा है। उसकी इस लगातार सफलता ने उसके कौशल विकास तंत्र को दुनिया के सामने एक उदाहरण के रूप में पेश किया है। इसी व्यवस्था को समझने के लिए भारतीय दल के अधिकारियों ने शंघाई के जुहुई डिस्ट्रिक्ट स्थित शंघाई इंडस्ट्रियल टेक्नोलॉजी स्कूल का दौरा किया।

प्राथमिक स्तर से शुरू होती है कौशल की पढ़ाई

चीन के इस मॉडल की खास बात यह है कि वोकेशनल शिक्षा को केवल युवाओं या रोजगार की तलाश करने वाले विद्यार्थियों तक सीमित नहीं रखा गया है। प्राथमिक स्तर से ही बच्चों को उनकी उम्र और रुचि के अनुसार व्यावहारिक गतिविधियों से जोड़ा जाता है।

स्कूल में अलग-अलग कौशल विधाओं के लिए प्रयोगशालाएं और प्रशिक्षक मौजूद हैं। छोटे बच्चों के लिए घड़ी की असेंबलिंग, खिलौने बनाने और इसी तरह की गतिविधियों के जरिए तकनीकी समझ विकसित करने की शुरुआत की जाती है। इससे बच्चों को केवल किताबी ज्ञान तक सीमित रखने के बजाय चीजों को करके सीखने का अवसर मिलता है।

चीन में वोकेशनल शिक्षा और अकादमिक शिक्षा को एक-दूसरे का विरोधी नहीं माना जाता। अधिकारियों के मुताबिक, वोकेशनल स्कूलों में विद्यार्थियों को भाषा ज्ञान और अन्य आवश्यक अकादमिक जानकारी भी दी जाती है। इसका उद्देश्य यह है कि विद्यार्थी शिक्षा के साथ किसी व्यावहारिक कौशल में भी दक्षता हासिल कर सकें।

63 कौशल विधाओं में भारत की भागीदारी

शंघाई में वर्ल्ड स्किल्स प्रतियोगिता 2026 शुरू हो चुकी है। इसमें 40 से अधिक देशों के प्रतिभागी अपने कौशल का प्रदर्शन कर रहे हैं। भारत ने इस बार कुल 64 में से 63 कौशल विधाओं में 70 प्रतिभागियों के दल के साथ हिस्सा लिया है। प्रतियोगिता के परिणाम 27 सितंबर को घोषित किए जाएंगे।

भारतीय पवेलियन में जीवन जीने की 64 पारंपरिक कलाओं की अवधारणा और कल्पवृक्ष के माध्यम से यह संदेश देने की कोशिश की गई है कि कौशल भारतीय परंपरा का भी महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है।

भारत को बदलनी होगी कौशल को देखने की सोच

भारत में वर्ष 2014 में अलग कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय बनने के बाद कौशल प्रशिक्षण को लेकर सरकारी स्तर पर प्रयास बढ़े हैं। हालांकि चीन के मॉडल से यह संकेत मिलता है कि केवल योजनाएं बनाना पर्याप्त नहीं है। कौशल को लेकर समाज की सोच में भी बदलाव जरूरी है।

प्रशिक्षण महानिदेशालय के महानिदेशक दिलीप कुमार ने चीन के कौशल स्कूल का दौरा करने के बाद कहा कि यह मानसिकता बदलनी होगी कि कौशल प्रशिक्षण केवल उन युवाओं के लिए है, जो अकादमिक शिक्षा में अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाते।

भारत में उद्योगों की जरूरत के अनुसार आधुनिक प्रशिक्षण केंद्र, हाईटेक प्रयोगशालाएं और बेहतर प्रशिक्षक विकसित करने की आवश्यकता है। कौशल को सम्मान और रोजगार से जोड़ने वाला मजबूत इकोसिस्टम तैयार किया जाए तो भारत में बड़ी संख्या में युवाओं को बेहतर अवसर मिल सकते हैं।

पीएम सेतु योजना के तहत औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों के कायाकल्प की दिशा में किए जा रहे प्रयासों से भी कौशल प्रशिक्षण व्यवस्था को आधुनिक बनाने की उम्मीद है। वर्ल्ड स्किल्स प्रतियोगिता में भारत की बढ़ती भागीदारी और चीन के मॉडल का अध्ययन इस बात का संकेत है कि आने वाले समय में कौशल शिक्षा देश की आर्थिक और रोजगार रणनीति का और महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकती है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!