चंडीगढ़, हरियाणा।
हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 12 वर्षों के कार्यकाल और केंद्र व राज्य की भाजपा सरकारों के प्रदर्शन पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने खासतौर पर बेरोजगारी, महंगाई, किसानों की दिक्कतों और विकास कार्यों में कमी को लेकर सरकार पर सवाल उठाए हैं।
हुड्डा ने कहा कि मोदी सरकार का कार्यकाल संसदीय हिसाब से लंबा है, लेकिन इसके बावजूद देश और हरियाणा दोनों में अपेक्षित विकास नहीं दिखा। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह प्रधानमंत्री के प्रति व्यक्तिगत टिप्पणी नहीं करना चाहते, पर भाजपा सरकार का प्रदर्शन मामूली आलोचना से परे है।
उनका आरोप है कि भाजपा सरकार हरियाणा में एक ‘नॉन-परफॉर्मिंग सरकार’ साबित हुई है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में ना कोई बड़ी मेट्रो योजना शुरू हुई, ना नई रेलवे लाइनें बिछाई गईं और बिजली उत्पादन में भी कोई उल्लेखनीय बदलाव नहीं हुआ। प्रदेश में शिक्षाविद संस्थान अथवा उच्च शिक्षा के लिए विश्वविद्यालय स्थापित नहीं हुए, जिससे युवाओं के लिए अवसर सीमित रह गए हैं।
किसानों की हालत पर बात करते हुए हुड्डा ने कहा कि खेती की लागत बढ़ रही है जबकि किसानों की आय घटती जा रही है। उन्होंने कहा कि एमएसपी प्रभावी रूप से किसानों तक पहुँच नहीं पा रहा है, जिससे कृषि क्षेत्र संकटग्रस्त होता जा रहा है। यह आर्थिक दबाव किसानों की परेशानियों को और बढ़ा रहा है।
बेरोजगारी के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि प्रदेश में बेरोजगारी की दर बढ़ी है और युवा रोजगार की कमी से जूझ रहे हैं। साथ ही कानून-व्यवस्था की स्थिति भी चिंताजनक है, जिससे लोग अपने आप को सुरक्षित महसूस नहीं कर रहे हैं। हुड्डा ने कहा कि हरियाणा के सामाजिक सूचकांक यह दर्शाते हैं कि सरकार की नीतियाँ सफल नहीं हैं।
रोहतक बाजार में आग लगने की घटना पर हुड्डा ने दुःख व्यक्त किया। उन्होंने बताया कि इस हादसे में तीन लोगों की जान गई और सात से आठ दुकानें पूरी तरह जलीं। कई परिवारों की आजीविका खत्म हो गई है और मकानों को भी क्षति पहुंची है। उन्होंने सरकार से मांग की कि पीड़ित परिवारों के लिए राहत पैकेज बढ़ाया जाए और मृतकों के परिवारों को मुआवजा तथा एक सरकारी नौकरी दी जाए। साथ ही आग में क्षतिग्रस्त व्यापारियों को आर्थिक मदद दी जाए ताकि वे पुनः कारोबार शुरू कर सकें।
हुड्डा ने तृणमूल कांग्रेस और कांग्रेस के संबंध तथा सोनिया गांधी और ममता बनर्जी की मुलाकात के विषय पर कहा कि यह राजनीतिक बातचीत है और उनके पास इस पर विस्तार से जानकारी नहीं है। साथ ही उन्होंने दल-बदल की राजनीति के खिलाफ अपना रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि कोई भी जनप्रतिनिधि पार्टी बदलना चाहे तो उसे पहले अपने पद से इस्तीफा देना चाहिए और फिर जनता से नया जनादेश लेना चाहिए। लोकतंत्र में जनता का विश्वास सर्वोपरि होता है और चुने हुए प्रतिनिधियों को इसका सम्मान करना अनिवार्य है।
