एसीआई ने आंध्र प्रदेश में SIR का विस्तार किया: गणना 24 जुलाई तक, अंतिम रोल 3 अक्टूबर को

आंध्र प्रदेश, भारत – निर्वाचन आयोग ने राज्य में मतदाता सूची के प्रारूपिक प्रकाशन की तिथि को अब 31 जुलाई 2026 निर्धारित किया है। इस निर्णय के तहत, दावों और आपत्तियों को प्रस्तुत करने की प्रक्रिया भी 31 जुलाई 2026 से शुरू होकर 30 अगस्त 2026 तक चलेगी। इसके बाद, इन दावों और आपत्तियों के निपटान की अवधि 31 जुलाई से लेकर 28 सितंबर 2026 तक निर्धारित की गई है।

मतदाता सूची का सही और अद्यतन होना लोकतांत्रिक प्रक्रिया की एक महत्वपूर्ण आवश्यकता है क्योंकि यह चुनावों की पारदर्शिता और निष्पक्षता को सुनिश्चित करता है। आयोग का यह कदम निर्वाचन प्रक्रिया को और अधिक सुव्यवस्थित बनाने और मतदाताओं की सुविधा के लिए उठाया गया है।

राज्य के मतदाता सूची में समायोजन करने की प्रक्रिया के दौरान, मतदाताओं को अपनी जानकारी की पुष्टि करने तथा किसी भी त्रुटि या विसंगति के खिलाफ आपत्ति दर्ज कराने का अधिकार है। इसके लिए आयोग ने 31 जुलाई से 30 अगस्त तक का समय दिया है जिसमें लोग अपने दावे और اعتراض दर्ज करवा सकते हैं।

आपत्तियों और दावों के निपटान की अवधि भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसमें आयोग यह सुनिश्चित करता है कि सभी प्रस्तुत की गई जानकारियों को उचित जांच के बाद सही रूप से सूची में समायोजित किया जाए। यह कार्य 31 जुलाई से 28 सितंबर तक चलेगा, जिससे कि अंतिम सूची विश्वसनीय और त्रुटिरहित बनाई जा सके।

इन प्रक्रियाओं के पूरा होने के बाद, मतदाता सूची के अंतिम प्रकाशन की तारीख 3 अक्टूबर 2026 रखी गई है, जो चुनाव के दृष्टिगत अंतिम और अधिकारिक सूची मानी जाएगी। इससे पहले मतदाता अपनी जानकारी में सुधार कराने के लिए पूरी प्रक्रिया में भाग ले सकते हैं।

इस अद्यतन मतदाता सूची का महत्व इसलिए भी है क्योंकि यह आगामी चुनावों में सभी योग्य मतदाताओं को मतदान करने का अधिकार सुनिश्चित करता है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि चयन प्रक्रिया पारदर्शी, निष्पक्ष और समयबद्ध तरीके से पूरी की जाएगी।

मतदाता सूची के संशोधन और अंतिमकरण में शामिल इस विस्तारित समयावधि से मतदाताओं को अपनी जानकारी सही कराने और सुनिश्चित करने का पर्याप्त समय उपलब्ध होगा। इससे आंध्र प्रदेश में आगामी चुनावों की गुणवत्ता और लोकतंत्र की मजबूती पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।

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