चेन्नई, तमिलनाडु: महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराधों का मुख्य कारण नशे की वस्तुओं का प्रसार है। यह समस्या मई 2026 में अचानक उत्पन्न नहीं हुई है, बल्कि यह दशकों से चली आ रही है। यह बात राज्य के मुख्यमंत्री ने हाल ही में एक संवाददाता सम्मेलन में कही।
मुख्यमंत्री ने बताया कि हालांकि यह समस्या पुरानी है, लेकिन इसे अनदेखा किया गया, जिसके कारण यह और विस्तार कर गई। उन्होंने कहा कि नशे के गलत प्रभावों से लड़ने के लिए सरकार व्यापक कदम उठा रही है।
उन्होंने कहा, “हम यह सुनिश्चित करेंगे कि नशा फैलाने वाले तत्वों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। हमारी प्राथमिकता महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा है।” मुख्यमंत्री ने दिखाया कि सरकार ने विशेष पुलिस बल और जागरूकता अभियान शुरू कर नशे की जड़ तक पहुँचने का प्रयास किया है।
अधिकारियों के अनुसार, नशे की वस्तुएं उच्च अपराध गतिविधियों का स्रोत बन जाती हैं, जो महिलाओं और बच्चों को जोखिम में डालती हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि केवल कड़े कानून से ही समस्या का समाधान संभव नहीं है, बल्कि सामाजिक जागरूकता और शिक्षा भी उतनी ही जरूरी है।
उन्होंने नागरिकों से भी अपील की कि वे इस समस्या के प्रति संवेदनशील रहें और पुलिस अथवा संबंधित एजेंसियों को सूचनाएं उपलब्ध कराएं। सरकार ने नशे की रोकथाम एवं इससे जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए विशेष आयोग का गठन भी किया है।
राज्य सरकार की यह पहल न केवल अपराध की संख्या में कमी लाने की दिशा में है, बल्कि समाज में सुरक्षित वातावरण बनाने की भी कोशिश है, जहाँ महिलाएं और बच्चे सुरक्षित और सम्मानपूर्ण जीवन जी सकें। मुख्यमंत्री ने कहा कि तमिलनाडु की जनता के सहयोग से ही यह लक्ष्यों की पूर्ति संभव है।
यह समस्या सिर्फ सम्प्रेषण ही नहीं अपितु बेहतर नीति निर्माण, यथार्थपरक क्रियान्वयन और सामूहिक प्रयासों का विषय है। सरकार का यह दृढ़ निश्चय है कि नशा और उससे जुड़े अपराधों के खिलाफ सामूहिक लड़ाई लड़कर सुरक्षित तमिलनाडु का निर्माण किया जाएगा।
