भारतीय विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने काठमांडू में नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह से मुलाकात की। यह बैठक खास इसलिए मानी गई क्योंकि शाह ने पहले कई मंत्रियों से मुलाकात टाल दी थी। मार्च में पद संभालने के बाद यह उनकी पहली द्विपक्षीय बैठक है। बातचीत में पानी के संसाधन, ऊर्जा और व्यापार जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई।
शुरुआती असहमति और फिर संवाद
मई में भारत का प्रस्तावित दौरा अचानक बिना किसी आधिकारिक कारण के रद्द हो गया था। काठमांडू पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, बालेन शाह की नीति विदेश मंत्रियों के रैंक से नीचे के अधिकारियों से सीधे मिलना नकारने की रही है। इसी कारण इस साल की शुरुआत में उन्होंने अमेरिकी अधिकारियों के साथ भी बैठक से इनकार किया था।
इसके बावजूद, भारत के साथ संपर्क पूरी तरह नहीं टूटा। जून में राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी की चेयरपर्सन रबी लामिछाने नई दिल्ली गईं। उसके बाद जुलाई में शाह ने भारतीय राजदूत नवीन श्रीवास्तव के साथ बैठक की, जो पिछले रवैये से अलग मानी गई।
बाढ़ राहत और आर्थिक सहयोग
अगस्त में आई भयंकर बाढ़ के बाद भारत की मदद से दोनों देशों के संबंध और मजबूत हुए। भारत ने 26 अगस्त से 19 सितंबर के बीच 140 टन से अधिक राहत सामग्री भेजी, जिसमें बचाव दल और जरूरी उपकरण शामिल थे। शाह ने सितंबर में संयुक्त राष्ट्र महासभा में भी भारत की प्रशंसा की। उन्होंने नेपाल, भारत और चीन के बीच हिमालयन क्लाइमेट रेजीलिएंस मैकेनिज्म का प्रस्ताव रखा।
काठमांडू पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, नेपाल ने भारत से लगभग 2 बिलियन अमेरिकी डॉलर के आर्थिक पैकेज की मांग की है, जिसमें ग्रांट और लाइन ऑफ क्रेडिट शामिल हैं। शाह और मिसरी ने इस प्रस्ताव पर चर्चा की। नेपाल इस फंड का इस्तेमाल बाढ़ से प्रभावित ट्रांसमिशन लाइनों की मरम्मत और पुनर्निर्माण के लिए करना चाहता है।
सीमा विवाद और भर्ती योजना पर बातचीत
मुलाकात में कालापानी-लिपुलेख क्षेत्र को लेकर सीमा विवाद और भारतीय सेना में गोरखा भर्ती पर रोक जैसे मसलों पर भी चर्चा हुई। नेपाल का तर्क है कि गोरखा भर्ती योजना 1947 के तीन-तरफा समझौते का उल्लंघन है। शाह के दौरे से भारत के साथ आर्थिक सहयोग के साथ-साथ इन विवादों को सुलझाने में मदद मिल सकती है।
यह बैठक दोनों देशों के बीच संबंधों में नये आयाम जोड़ने की कोशिश मानी जा रही है। भारतीय और नेपाली अधिकारी दोनों ही इस प्रक्रिया को सावधानी से आगे बढ़ा रहे हैं ताकि द्विपक्षीय सहयोग और स्थिरता बनी रहे।
अभी किसी आधिकारिक घोषणा का इंतजार है कि शाह का भारत दौरा कब होगा और उस दौरान किन विषयों पर सहमति बन सकती है। अफसरों का मानना है कि यह दौरा नेपाल-भारत संबंधों में एक नई शुरुआत साबित होगा।
समग्र रूप से यह मुलाकात नेपाल के तेवरों में कुछ नरमी और भारत के प्रति खुलापन दर्शाती है। इसके साथ ही दोनों देशों के बीच कई अहम मुद्दों पर संवाद की दिशा भी साफ हुई है।
