नई दिल्ली में गृह मामलों की संसदीय समिति ने दिल्ली-राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के बढ़ते वायु प्रदूषण और चरणबद्ध प्रतिक्रिया कार्ययोजना (ग्रैप) के प्रभावी क्रियान्वयन पर चर्चा करने का निर्णय लिया है। इसके अलावा, समिति कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और डीपफेक तकनीक से जुड़ी आंतरिक सुरक्षा चुनौतियों और धोखाधड़ी के नए तरीकों पर भी विचार करेगी। यह बैठक आने वाले समय में आयोजित की जाएगी।
संसदीय समितियों का पुनर्गठन
सितंबर महीने में संसदीय समितियों का पुनर्गठन किया गया था, जिनका कार्यकाल एक वर्ष तक सीमित है। गृह मामलों की इस स्थायी समिति का कामावधि कई अहम विषयों पर चर्चा करना और कानून प्रवर्तन विभागों तथा सरकारी एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना है। समिति के अध्यक्ष भाजपा सांसद राधामोहन दास अग्रवाल हैं, जो इस पहल को आगे बढ़ा रहे हैं।
गृह मामलों की समिति द्वारा जिन विषयों को चयनित किया गया है, उनमें दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण की स्थिति और प्रभावी नियंत्रण के उपाय प्रमुख हैं। 22 सितंबर को वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने दिल्ली-एनसीआर के लिए चरणबद्ध प्रतिक्रिया कार्ययोजना (GRAP) के तीसरे चरण को लागू कर दिया।
दिल्ली-एनसीआर में GRAP-3 के प्रावधान
सीएक्यूएम के निर्देशानुसार, GRAP-3 के तहत दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण रोकने के लिए कड़े कदम उठाए गए हैं। निर्माण कार्यों पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है, जिससे धूल प्रदूषण को सीमित किया जा सके। इसके अलावा, दिल्ली में पंजीकृत डीजल चालित BS-IV और उससे नीचे के मध्यम मालवाहक वाहनों पर सख्त पाबंदियां लगाई गई हैं।
इंटर-स्टेट डीजल बसों के संचालन को भी बंद कर दिया गया है ताकि प्रदूषण नियंत्रण में सुधार हो सके। गैर-जरूरी निर्माण और तोड़-फोड़ के काम सभी क्षेत्रों में पूरी तरह निषिद्ध कर दिए गए हैं, जिससे हवा की गुणवत्ता पर तुरंत सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
सीएक्यूएम ने बृहस्पतिवार शाम चार बजे दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक 382 दर्ज किया, जो ‘‘बहुत खराब’’ श्रेणी में आता है। यह स्थिति राजधानी में प्रदूषण नियंत्रण की नाजुकता को दर्शाती है।
समिति की आगामी बैठक में तकनीकी नवाचारों जैसे एआई और डीपफेक द्वारा आंतरिक सुरक्षा को होने वाले प्रभावों पर भी गहराई से चर्चा की जाएगी। इस कदम से गृह मंत्रालय को धोखाधड़ी और साइबर सुरक्षा में हो रहे नए खतरों की बेहतर समझ मिलेगी।
ध्यान देने वाली बात यह है कि संसदीय समिति का यह पुनर्गठन और सक्रियता वायु प्रदूषण तथा आंतरिक सुरक्षा के मुद्दों को प्राथमिकता देने का संकेत है। इससे दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में प्रदूषण नियंत्रण उपायों की उच्च आलोचना और सुधार की उम्मीद जताई जा रही है।
आखिरकार, यह चर्चा दिल्लीवासियों के लिए बेहतर वायु गुणवत्ता और सुरक्षित तकनीकी उपयोग सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है। संसदीय समितियां अपने सुझाए उपायों से केंद्र और राज्य सरकारों को नीति निर्धारण में मार्गदर्शन प्रदान करेंगी।
