अमेरिका में 3 नवंबर को होने वाले मिडटर्म चुनावों में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी के लिए चुनौतियां बड़ी हैं। चुनाव नतीजे केवल कांग्रेस की रचना तय करेंगे, बल्कि ट्रंप के कार्यकाल पर जनता की राय भी सामने आएगी। पिछले 76 वर्षों में मिडटर्म चुनावों में राष्ट्रपति की पार्टी को अक्सर नुकसान का सामना करना पड़ा है।
मिडटर्म चुनावों में राष्ट्रपति की पार्टी का परिदृश्य
1946 से 2022 तक हुए 20 मिडटर्म चुनावों में 18 बार राष्ट्रपति की पार्टी ने प्रतिनिधि सभा में अपनी सीटें गंवाई हैं। औसतन 26 सीटों की हानि हुई। यह इतिहास दर्शाता है कि मतदान में जनता अक्सर राष्ट्रपति के कामकाज से असंतुष्ट होती है, जिससे पार्टी को राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ता है। इस बार भी ट्रंप के लिए अपनी पार्टी का बहुमत बचाए रखना बड़ी चुनौती होगी।
राष्ट्रपति का कार्यकाल चार साल का होता है, लेकिन हर दो साल बाद मिडटर्म चुनाव कराए जाते हैं। इस चुनाव में प्रतिनिधि सभा की सभी 435 सीटों और सीनेट की करीब 35 सीटों के लिए मतदान होता है। हालांकि राष्ट्रपति का नाम सीधे बैलेट पर नहीं होता, मगर संसद में बनने वाली राजनीतिक व्यवस्था से उनकी लोकप्रियता और नीतियों का मूल्यांकन होता है।
राष्ट्रपति की पार्टी को ज्यादातर नुकसान ही हुआ है
मिडटर्म चुनावों में राष्ट्रपति की पार्टी के नुकसान को मिडटर्म पेनल्टी कहा जाता है। इसके पीछे कारण यह है कि सत्ता में आने के दो साल बाद जनता पर नीतियों का असर महसूस होने लगता है। महंगाई, बेरोजगारी और सरकार की कार्यप्रणाली से मतदाता असंतुष्ट होकर अक्सर विपक्षी दल को बढ़ावा देते हैं।
ऐतिहासिक रूप से केवल दो बार राष्ट्रपति की पार्टी को फायदा हुआ। 1998 में बिल क्लिंटन की डेमोक्रेटिक पार्टी ने चार सीटें बढ़ाईं और 2002 में जॉर्ज डब्ल्यू. बुश की रिपब्लिकन पार्टी ने आठ सीटें जीतीं। बाकी सभी मिडटर्म चुनावों में राष्ट्रपति की पार्टी को नुकसान झेलना पड़ा है।
डेमोक्रेटिक राष्ट्रपति के कार्यकाल में पार्टी को हाउस में औसतन 29 सीटों का नुकसान हुआ है, जबकि रिपब्लिकन के कार्यकाल में यह संख्या लगभग 23 सीटें रही। सबसे बड़ा नुकसान बराक ओबामा के समय 2010 में हुआ, जब डेमोक्रेटिक पार्टी ने 64 सीटें गंवाईं। रिपब्लिकन के लिए 1958 में 50 सीटों की हानि सबसे बड़ी रही।
डोनाल्ड ट्रंप भी इस परंपरा से अछूते नहीं हैं। 2018 के मिडटर्म में उनकी पार्टी ने हाउस की 42 सीटें गंवाईं, हालांकि सीनेट में स्थिति बेहतर रही। इतिहास में सात बार हाउस का नियंत्रण राष्ट्रपति की पार्टी से विपक्ष में चला गया है।
सीनेट चुनावों का अलग प्रभाव
सीनेट में भी राष्ट्रपति की पार्टी को नुकसान हुआ है, पर स्थिति हाउस से थोड़ी भिन्न है। 1946 से 2022 के बीच 13 बार सीनेट की सीटें राष्ट्रपति की पार्टी ने खोई हैं, साथ ही छह बार उसे सीनेट का नियंत्रण भी छूट गया है। सीनेट में चुनावों का चक्र एक अलग होता है और इसमें राजनीतिक माहौल के साथ राज्यों की स्थिति का भी प्रभाव पड़ता है।
सीनेट में सबसे बड़ा नुकसान 1958 में आइजनहावर के कार्यकाल में रिपब्लिकन पार्टी को 13 सीटों का झटका लगा था। ट्रूमैन के कार्यालय में 1946 में डेमोक्रेट्स ने 12 सीटें गंवाईं। 2014 में ओबामा की पार्टी ने नौ सीटें गंवाईं और रिपब्लिकन पार्टी को सीनेट का नियंत्रण मिल गया।
