चीन में एक नया रोजगार ट्रेंड तेजी से लोकप्रिय हो रहा है, जहां स्टूडेंट्स और गृहणियां एआई से चलने वाले रोबोट्स को रोजमर्रा के काम सिखा रहे हैं। ये लोग रोबोट के लिए झाड़ू-पोछा लगाने, कपड़े तह करने और बर्तन धोने जैसे कामों की ट्रेनिंग करते हैं। इससे उन्हें छुट्टियों में अच्छी कमाई भी हो रही है।
रोबोट ट्रेनिंग कैसे होती है?
टेक कंपनियां इंसानों से फिजिकल डेटा इकट्ठा करने के लिए मोशन-कैप्चर सेंसर, ब्रेसलेट और कैमरे इस्तेमाल करती हैं। ट्रेनर इन उपकरणों को पहनकर घर या फैक्ट्री में झाड़ू लगाना, कपड़े तह करना और अन्य काम करते हैं। इनके हर मूवमेंट को रिकॉर्ड कर एआई मॉडल को सिखाया जाता है ताकि रोबोट इन कामों को खुद कर सकें।
यह ट्रेनिंग न केवल तकनीकी विकास के लिए जरूरी है बल्कि चीन के बढ़ते बुजुर्ग आबादी और कम होती मानव श्रम शक्ति को पूरा करने में भी मददगार साबित होगी।
छुट्टियों के दौरान इस काम में लगे स्टूडेंट्स को अच्छी पेमेंट मिलती है। शानक्सी के 22 वर्षीय छात्र सन का अनुभव है कि दिन की शिफ्ट के लिए उन्हें 120 युआन और रात की शिफ्ट पर 135 युआन मिलते हैं। हालांकि यह काम मानसिक और शारीरिक रूप से थका देने वाला होता है।
घर से भी मिल रही कमाई
गुओ होंगजुआन नाम की वर्किंग मदर जिआंगसू से रोज करीब 6 घंटे इस काम में लगती हैं। वह घर से ही किताबें सही तरीके से लगाना, मेज साफ करना जैसे काम करते हुए रोबोट ट्रेनिंग डेटा एकत्र करती हैं। उसकी मासिक कमाई लगभग 4,000 युआन है जो ₹57,000 के करीब है।
कुछ ट्रैनर बताते हैं कि उन्हें दिन में कई बार एक ही काम जैसे बर्तन धोना या मेज पर चीजें व्यवस्थित करनी पड़ती हैं, यह काम स्क्रीन के जरिए मॉनिटर किया जाता है ताकि उनकी प्रोडक्टिविटी बनी रहे।
सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर इन नौकरियों के विज्ञापन तेजी से बढ़ रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, यह काम करने वाले महीने में 4,000 से 6,000 युआन तक (लगभग ₹85,000) कमा सकते हैं।
रॉयटर्स की रिपोर्ट बताती है कि कई बार एक सक्रियता को रोबोट्स को सिखाने के लिए 300 तक प्रयास करना पड़ता है जबकि अनुभवी ट्रैनर को 50 बार कोशिश करनी पड़ती है। यह धीमी प्रक्रिया है, पर चीन में मजदूरों की कमी को पूरा करने का यह एक नया तरीका माना जा रहा है।
