श्रीनगर, जम्मू-कश्मीर। नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी) के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने आगामी जंतर मंतर में राज्यता की मांग को लेकर आयोजित किए जाने वाले धरने में इंडिया ब्लॉक और जम्मू-कश्मीर की सभी राजनीतिक पार्टियों से समर्थन मांगने की घोषणा की है। पार्टी ने यह भी बताया कि सभी राजनीतिक दलों को औपचारिक निमंत्रण पत्र भी भेजे जाएंगे।
फारूक अब्दुल्ला ने अपने बयान में कहा कि इस आंदोलन का मकसद जम्मू-कश्मीर की राज्यता वापस दिलाने के लिए केंद्र सरकार पर दबाव बनाना है। उन्होंने कहा कि केंद्र शासित प्रदेश के रूप में जम्मू-कश्मीर की उपस्थिति और उसकी समस्याओं का समाधान तभी संभव है जब क्षेत्र की राजनीतिक पार्टियां और केंद्र सरकार के बीच संवाद स्थापित हो।
एनसी के सूत्रों की माने तो पार्टी ने विभिन्न पार्टियों के नेताओं के साथ संपर्क साधना शुरू कर दिया है। फारूक अब्दुल्ला ने दिल्ली की जंतर मंतर पर आयोजित इस प्रदर्शन को सफल बनाने के लिए राजनीतिक एकता की आवश्यकता पर ज़ोर दिया है। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर की स्थिति सुधारने के लिए सभी पार्टियों को एकजुट होकर अपने मतभेदों से ऊपर उठना होगा।
इससे पहले भी फारूक अब्दुल्ला ने केंद्र सरकार से कई बार संवाद की अपील की है, लेकिन प्रतिक्रिया सीमित रही है। उन्होंने कहा कि अब जरूरत है ठोस कदम उठाने की, और इसका पहला कदम इस तरह के शांतिपूर्ण सार्वजनिक आंदोलनों के जरिए नागरिकों और राजनीतिक नेतृत्व दोनों की आवाज को केंद्र तक पहुँचाना होगा।
राज्य के विभिन्न हिस्सों से भी इस धरने को लेकर समर्थन और उत्साह व्यक्त किया जा रहा है। स्थानीय राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि फारूक अब्दुल्ला की अपील सफल होती है, तो यह जम्मू-कश्मीर में राजनीतिक मोर्चे पर एक नई लहर लेकर आएगा।
ध्यान दें कि 2019 में जम्मू-कश्मीर से विशेष दर्जा समाप्त होने के बाद से राज्य की राजनीतिक और सामाजिक परिस्थितियां काफी बदल गई हैं। इस ओर केंद्र सरकार और स्थानीय पार्टियों के बीच अक्सर मतभेद सामने आते रहे हैं। एनसी का यह माध्यमिक प्रयास राजनीतिक संवाद को पुनर्जीवित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
आगामी जंतर मंतर धरना कब आयोजित किया जाएगा, इस संबंध में पार्टी जल्द ही विस्तृत कार्यक्रम जारी करेगी। सभी पार्टियों को भेजे जाने वाले निमंत्रण पत्रों में इस आंदोलन की मुख्य मांग और योजनाओं को विस्तार से बताया जाएगा।
इधर, कुछ विरोधी दलों ने भी इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया देने शुरू कर दी है। जल्द ही स्थिति स्पष्ट होगी कि जम्मू-कश्मीर की राजनीतिक पार्टियां इस आंदोलन में किस हद तक सहयोग करेंगीं।
