एक्स्ट्रा फीस देकर भी जल्दी नहीं मिलेगा H1B वीजा, अमेरिका में नया नियम लागू

अमेरिका में हाल ही में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन द्वारा ‘प्रीमियम प्रोसेसिंग’ की समय सीमा में बदलाव पर विचार किया जा रहा है। यह कदम विशेष रूप से विदेशी वर्कर्स, स्टूडेंट्स और उन कंपनियों को प्रभावित करेगा जो अतिरिक्त फीस देकर अपनी इमिग्रेशन प्रक्रियाओं को तेज करना चाहते हैं। नया नियम लागू होने पर प्रीमियम फीस देने के बावजूद भी H-1B वीजा, ग्रीन कार्ड या वर्क परमिट तेजी से नहीं मिलेगा।

प्रीमियम प्रोसेसिंग का बदलता स्वरूप

यह प्रस्ताव फिलहाल ऑफिस ऑफ मैनेजमेंट एंड बजट (OMB) के पास समीक्षा के लिए भेजा गया है। नए नियम के तहत “प्रीमियम प्रोसेसिंग” में दी जाने वाली सेवाओं की प्रक्रिया की अवधि बढ़ सकती है। हालांकि, इस नियम के खास प्रावधान अभी सार्वजनिक नहीं किए गए हैं। इसे लागू करने से पहले इस नियम को फेडरल रिव्यू और कमेंट प्रक्रिया से गुजरना होगा, जिसके बाद इसे अंतिम रूप दिया जाएगा।

USCIS कुछ मामलों को तेज़ी से निपटाने के लिए प्रीमियम प्रोसेसिंग फीस लेता है, जिससे आवेदक जल्दी वीजा, ग्रीन कार्ड या वर्क परमिट प्राप्त कर सके। आमतौर पर यह फीस 1780 डॉलर से लेकर 2965 डॉलर तक होती है और इसके तहत 15, 30 या 45 कामकाजी दिनों में प्रक्रिया पूरी होने की उम्मीद रहती है।

हालांकि, प्रीमियम प्रोसेसिंग का मतलब यह नहीं कि आवेदन उसी समय मंजूर भी हो जाएगा। USCIS समयावधि के भीतर फैसला कर सकता है, अतिरिक्त सूचना (RFE) मांग सकता है या आवेदन अस्वीकार करने का नोटिस (NOID) जारी कर सकता है। पिछले कुछ महीनों में यह समय सीमा कई बार लांघी गई है, यहां तक की उन मामलों में भी जहां एक्स्ट्रा फीस दी गई थी।

भारतीय स्टूडेंट्स और वर्कर्स पर असर

प्रतीक्षित नियम कई तरह के इमिग्रेशन मामलों को प्रभावित करेगा, जिनमें ग्रीन कार्ड के लिए फॉर्म I-140, H-1B, L-1, O-1 वीजा के लिए फॉर्म I-129, एंप्लॉयमेंट ऑथराइजेशन डॉक्यूमेंट (EAD) के लिए फॉर्म I-765 और नॉनइमिग्रेंट स्टेटस को बढ़ाने या बदलने के लिए फॉर्म I-539 शामिल हैं।

भारतीय वर्कर्स जिनके लिए H-1B, L-1, O-1 वीजा महत्वपूर्ण हैं, उनके लिए यह बदलाव चिंता का कारण हो सकता है। फॉर्म I-129 के बाद वीजा की प्रक्रिया में पहले ही देरी होती है, जिसे प्रीमियम प्रोसेसिंग के जरिए जल्दी किया जाता था। इसी तरह ग्रीन कार्ड के लिए फॉर्म I-140 की प्रक्रिया में भी असर हो सकता है।

वर्तमान सिस्टम में विभिन्न कैटेगरी के लिए समय सीमा अलग-अलग है। EB-1 श्रेणी में मल्टीनेशनल मैनेजर्स तथा EB-2 ‘नेशनल इंटरेस्ट वेवर’ के लिए 45 कार्य दिवस की सीमा है। F-1 स्टूडेंट वीजा धारकों के लिए OPT और स्टेटस बदलाव के मामलों में 30 कार्य दिवस की निर्धारित समय सीमा है।

यदि सरकार इन समय सीमाओं को बढ़ाती है, तो भारतीय प्रोफेशनल्स और स्टूडेंट्स को वर्क ऑथराइजेशन एवं ग्रीन कार्ड की प्रक्रिया में अधिक इंतजार करना पड़ेगा। इसके अलावा, इसके कारण कंपनियों को भी नौकरी से जुड़े मामलों के तेजी से निपटारे में दिक्कत आ सकती है और छात्रों को जल्द काम करने की अनुमति नहीं मिलेगी।

Source

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!