अमेरिका में एक भयानक हत्या की घटना ने घरेलू हिंसा की कड़वी हकीकत को उजागर किया है। 50 साल के डेमन फॉय ने अपनी 44 वर्षीय पूर्व प्रेमिका अल्बर्टा डेल की हत्या कर उसके शव को टुकड़ों में काटकर एक सूटकेस में छुपाया था। यह मामला भारत के कुख्यात “नीले ड्रम” केस से तुलना में आया है।警方 को डेमन के घर की अलमारी से सूटकेस में कटा हुआ सिर और अन्य अवशेष मिले। सूटकेस में एक सूखा फूल भी मिला, जो अपराध की मानसिकता को दर्शाता है।
हत्या के कारण और जांच
जांच में सामने आया कि अल्बर्टा ने डेमन से अपना रिश्ता खत्म कर दिया था, जिससे डेमन नाराज था। मार्च 2024 के अंत में उसने यह क्रूर कृत्य किया। आश्चर्य की बात है कि अल्बर्टा ने पहले से ही अधिकारियों को सतर्क कर दिया था कि यदि वह लापता हुई तो इसके पीछे डेमन हो सकता है। कोर्ट में डेमन ने अपना जुर्म कबूल किया है।
पुलिस ने फॉय के घर से खून के धब्बे, हड्डियों के टुकड़े और शरीर से संबंधित ऊतकों के नमूने बरामद किए। साथ ही कुल्हाड़ी, बागवानी कैंची, और दांतेदार चाकू भी मिले, जो संभावित हथियार माने जा रहे हैं। पुलिस ने मृतक के शरीर के बाकी हिस्सों को गुप्त जगह पर फेंकने की आशंका जताई।
घर छोड़ने का विवाद
फॉय के मुताबिक, मार्च में अल्बर्टा ने उसे घर छोड़ने के लिए कहा था। उसने दावा किया कि अल्बर्टा ने उसके साथ पूरा रिश्ता बनाकर उसका फायदा उठाया था। हालांकि, इस बयान से हत्या का कोई औचित्य स्थापित नहीं होता।
तलाश और गिरफ्तारी
1 अप्रैल को अल्बर्टा के परिवार ने उनकी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करवाई। अगले दिन पुलिस को सड़क किनारे अल्बर्टा के निजी सामान मिले। 3 अप्रैल को जांच के दौरान फॉय ने बुदबुदाते हुए हत्या स्वीकार की और उसे गिरफ्तार कर लिया गया।
फॉय पर पहले भी घरेलू हिंसा के आरोप थे। एक पुराने मामले में उसने हथियार का भी इस्तेमाल किया था। हत्या के समय उसके खिलाफ अल्बर्टा से दूर रहने का कोर्ट आदेश जारी था।
आगे की कानूनी प्रक्रिया
7 अक्टूबर 2026 को फॉय ने दूसरी दर्जे की हत्या स्वीकार की। अभियोजन पक्ष ने कहा कि मामले के समझौते के तहत उसे 23 साल से उम्रकैद तक की सजा हो सकती है। अदालत ने सजा सुनाने की तारीख 16 दिसंबर 2026 निर्धारित की है।
उल्स्टर काउंटी के जिला अटॉर्नी इमैनुएल नेजी ने कहा कि घरेलू हिंसा के खिलाफ सख्त कदम जरूरी हैं। उन्होंने पीड़ित परिवार के धैर्य और न्याय प्रक्रिया में सहयोग की प्रशंसा की, साथ ही कहा कि सुरक्षा सिर्फ कागजों पर नहीं, बल्कि असली जिंदगी में भी होनी चाहिए।
