अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने दिल्ली में एक महत्वपूर्ण बयान दिया है, जिसमें उन्होंने कहा कि डोनाल्ड ट्रंप अगले 10 दिनों के भीतर भारत पर 100% टैरिफ लगाने या न लगाने का निर्णय ले सकते हैं। यह बयान ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम में आया, जहां उन्होंने दोनों देशों के बीच इस मुद्दे पर चल रही बातचीत का भी जिक्र किया। अभी तक इस विषय में अंतिम फैसला नहीं हुआ है।
टैरिफ का उद्देश्य और उसकी पड़ताल
सर्जियो गोर ने स्पष्ट किया कि अमेरिकी प्रतिबंध विशेष रूप से किसी एक देश को निशाना बनाने के लिए नहीं हैं। ये प्रतिबंध तीन श्रेणियों में बांटे गए हैं और भारत सहित कई देश इनमें आते हैं। उनका मानना है कि यह कदम युद्ध की मदद खत्म करने और उसकी आर्थिक मदद को रोकने के लिए उठाया गया है, ना कि किसी देश को दंडित करने के लिए।
असल मामले की बात करें तो, अमेरिका रूस की आर्थिक कमाई को कम करना चाहता है ताकि यूक्रेन युद्ध लंबे समय तक जारी रहने में असुविधा हो। रूस की कमाई का बड़ा स्रोत तेल-गैस है, और भारत रूस से सस्ते तेल की खरीदारी कर अपनी ऊर्जा आवश्यकताएं पूरी करता है। इस पर अमेरिका दबाव बना रहा है कि रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर अतिरिक्त टैरिफ लगाया जाए।
भारत-अमेरिका व्यापार और टैरिफ का प्रभाव
अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय के आंकड़ों के अनुसार, अमेरिका ने 2025 में भारत से 103.8 अरब डॉलर का सामान खरीदा। अगर टैरिफ बढ़ाए गए, तो खास तौर पर कपड़े, जूते, चमड़ा, हीरे-जवाहरात जैसे उत्पादों पर बुरा असर पड़ सकता है। इससे लाखों कामगारों की नौकरियां खतरे में आ सकती हैं।
उदाहरण के लिए, यदि किसी कपड़ा व्यापारी को अमेरिका से एक लाख शर्ट का ऑर्डर मिलता है, और टैरिफ के कारण कीमत बढ़ती है, तो अमेरिकी ग्राहक अन्य देशों से माल खरीद सकता है। इससे भारतीय कारोबारियों को वित्तीय नुकसान हो सकता है और उत्पादन घटने के कारण नौकरियां प्रभावित हो सकती हैं।
अगर निर्यात घटता है, तो विदेशी निवेशक भी भारत से पैसा निकाल सकते हैं जिससे रुपये पर दबाव पड़ेगा। इससे कच्चे तेल व इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के महंगे होने के कारण सामान्य उपभोक्ताओं को भी महंगाई झेलनी पड़ सकती है।
टैरिफ के कारण अगर भारत की बनी किसी वस्तु की कीमत अमेरिका में दोगुनी हो जाती है, तो खरीददार अन्य देशों का प्रोडक्ट खरीद सकते हैं। इससे भारत के निर्यातकों के लिए चुनौतियां और भी बढ़ जाएंगी।
पिछले वर्षों में अमेरिका ने पहले भी भारत पर अतिरिक्त टैरिफ लगाए हैं। साल 2025 में 25% टैरिफ बढ़ाने के बाद यह 50% तक पहुंच गया था। इसका असर भारत के कुछ प्रमुख निर्यात जैसे समुद्री उत्पादों और हीरों पर साफ देखा गया।
टैरिफ को ट्रंप केवल टैक्स नहीं मानते, बल्कि इसे दबाव बनाने के लिए भी इस्तेमाल करते हैं ताकि दूसरे देश उनकी शर्तों पर व्यापार करें और रूस के खिलाफ मिलकर काम करें। हालांकि, इससे दोनों देशों की कंपनियों और उपभोक्ताओं को महंगाई का सामना भी करना पड़ सकता है।
तीन संभावित रास्ते हैं: या तो ट्रंप 100% टैरिफ लगाते हैं, या भारत को छूट मिलती है, या दोनों देशों के बीच बातचीत से कोई समाधान निकलता है। 10 दिनों में ट्रंप का फैसला इस पूरी स्थिति का निर्धारण करेगा।
