सुप्रीम कोर्ट आज 15 अक्टूबर को INDIA ब्लॉक के नेताओं द्वारा दायर याचिका की सुनवाई करेगा। इस मामले की बेंच में मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी मोहना शामिल हैं। याचिका लोकसभा नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी सहित कुल 13 लोगों द्वारा दायर की गई है।
याचिका में क्या मांगे गईं
याचिका में निर्वाचन आयोग (ECI) के फैसलों को चुनौती दी गई है। इसके साथ ही 24 जून से शुरू हुई स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) पर रोक लगाई जाए, यह भी कहा गया है। विपक्ष ने बड़ी संख्या में वोटरों के नाम हटाने के मामले में कोर्ट से दखल देने और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की है। वोटर लिस्ट में गड़बड़ियों और वोट की चोरी के आरोपों को लेकर यह याचिका दायर की गई है।
इससे पहले याचिका की प्रक्रिया में बाधाएँ आईं। सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री ने याचिका में 14 कमियां बताई थीं, जिसमें पहचान के दस्तावेज अस्पष्ट थे, कई पेज गायब या पढ़े नहीं जा सकते थे और कुछ याचिकाकर्ताओं के वकालतनामा अधूरे थे। इस कारण 13 अक्टूबर को सुनवाई के लिए याचिका सूचीबद्ध नहीं की जा सकी।
कमियों को ठीक करने के बाद याचिका को पुनः दायर किया गया। इस प्रक्रिया में दो और याचिकाकर्ता शामिल किए गए, जिससे कुल संख्या 13 हो गई। वहीं, दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष अवमानना मामले में बिना शर्त माफी मांग ली है।
स्वतंत्र कमेटी और पारदर्शिता की मांग
विपक्ष के नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट में यह भी मांग की है कि ECINET और ERONET सिस्टम से जुड़े दस्तावेज, मीटिंग मिनट्स, इंटरनल नोटिंग्स और लॉग प्रस्तुत किए जाएं। उन्होंने रिटायर्ड न्यायाधीश की अध्यक्षता में टेक्निकल एक्सपर्ट्स की स्वतंत्र कमेटी बनाने की बात कही है, जो वोटर लिस्ट से हटाए गए नामों और EVM संबंधित तकनीकी प्रक्रियाओं का न्यायसंगत ऑडिट करे।
इसके अलावा, हटाए गए वोटरों की बूथ-वार लिस्ट और नाम हटाने के कारणों को सार्वजनिक करने की भी मांग की गई है। विपक्ष का कहना है कि बिना नोटिस और सुनवाई के बिना किसी नागरिक का नाम वोटर लिस्ट से हटाने पर रोक लगाई जाए।
याचिका में संवैधानिक नियमों का उल्लंघन करने वाले अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने, ऑनलाइन फॉर्म-6 के पुराने नियमों को पुनः लागू करने और वोट देने के अधिकार की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाने की भी अपील है।
इस पूरे मामले में सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर देश की चुनाव प्रक्रिया और लोकतंत्र के भविष्य की निगाहें टिकी हैं। विपक्ष ने मतदान के अधिकार को बचाने के लिए अपनी आवाज ऊँची की है, वहीं कोर्ट के फैसले से ही आगे की दिशा तय होगी।
