जर्मनी के फ्रैंकफर्ट से दिल्ली आ रही एयर इंडिया की फ्लाइट AI-2030 से हाईजैक होने का इमरजेंसी कोड फ्लैश होते ही सुरक्षा एजेंसियों में हड़कंप मच गया। बुधवार सुबह जब यह सूचना मिली, तो मुंबई और अहमदाबाद एयरपोर्ट ने तुरंत इस कोड को कैच किया। इसके बाद फ्लाइट को जयपुर एयरपोर्ट पर इमरजेंसी लैंडिंग कराई गई।
फ्लाइट जयपुर एयरपोर्ट पर सुरक्षित लैंडिंग
हाईजैक कोड 7500 का फ्लैश होना बड़े संकट का संकेत था। मुंबई और अहमदाबाद ATC ने इस जानकारी को तुरंत अपने अधिकारियों को दी। गंभीरता को देखते हुए दिल्ली की बजाय फ्लाइट को जयपुर एयरपोर्ट पर लाया गया। पांच घंटे तक सुरक्षा जांच और जांच-पड़ताल के बाद फ्लाइट को ग्रीन सिग्नल मिला तथा यात्रियों के साथ फ्लाइट जयपुर से दिल्ली के लिए रवाना हुई।
जांच में पता चला कि दोनों पायलटों ने इमरजेंसी कोड अपने द्वारा फ्लैश न करने की बात कही है। ऐसे में सवाल उठता है कि यह कोड एयरपोर्ट्स तक कैसे पहुंचा। सुरक्षा एजेंसियाँ जांच में जुटी हैं कि क्या प्लेन के सिस्टम ने यह कोड स्वतः जारी किया या ATC ने इसे गलत तरीके से समझा।
जांच में विशेषज्ञों के विचार
पायलटों के बीच तालमेल और उनकी दूसरी जानकारियों की भी जांच चल रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि हाईजैक कोड गलती से फ्लैश नहीं होता। ATC ने पायलटों से संपर्क कर कोड फ्लैश किए जाने की पुष्टि मांगी, जिस पर पायलटों ने इसे खारिज किया। सुरक्षा एजेंसियाँ यह भी देख रही हैं कि कहीं किसी ने दबाव में ऐसा तो नहीं कहा।
जांच सूत्रों के मुताबिक फ्लाइट जब पाकिस्तान के कराची के नीचे होकर भारत के गुजरात एयरस्पेस में प्रवेश कर रही थी, तब यह इमरजेंसी कोड फ्लैश हुआ। इस सूचना के मिलने के बाद देश की सुरक्षा मशीनरी अलर्ट पर आ गई। दिल्ली, एनएसजी, आईबी समेत कई एजेंसियों ने तुरंत कार्रवाई शुरू की।
जयपुर एयरपोर्ट पर फ्लाइट सुबह 9:35 बजे उतरी और सुरक्षा कर्मियों ने तलाशी शुरू की। फायर ब्रिगेड भी मौके पर पहुंच गई। प्लेन लैंडिंग के बाद तुरंत पायलटों और यात्रियों को बाहर निकाला गया। सबसे पहले पायलट-इन-कमांड और फिर को-पायलट को बाहर बुलाया गया।
यात्रियों को फ्लाइट के अंदर से बाहर निकालने में करीब 2 घंटे से अधिक वक्त लगा। इसके बाद प्लेन की पूरी जांच के बाद यात्रियों को फिर से एयरक्राफ्ट में बैठाया गया। दोपहर तक फ्लाइट जयपुर से दिल्ली के लिए रवाना हुई जहां सुरक्षित लैंडिंग की गई।
सुरक्षा एजेंसियाँ मामले की गहन जांच में जुटी हैं। डीजीसीए और बीसीएएस ने इस मामले में संयुक्त जांच शुरू की है। जांच कर यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि प्लेन के सिस्टम से कोड फ्लैश हुआ या किसी पायलट या ATC ने गलती की। किसी तकनीकी खराबी या समझने में त्रुटि की भी जांच हो रही है।
ये घटनाएं एयर इंडिया के बोइंग 787-9 ड्रीमलाइनर विमान से जुड़ी हैं और अब तक किसी भी संभावित खतरे से यात्रियों को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है। जांच के बाद ही असली कारण सामने आएगा कि हाईजैक कोड कैसे उत्पन्न और फ्लैश हुआ।
