दक्षिण भारत के लोगों के दांत अक्सर सफेद और चमकदार नजर आते हैं, जिसे देखकर कई लोग आश्चर्यचकित हो जाते हैं। इस विषय पर नवभारतटाइम्स.कॉम की हेल्थ एंड वेलनेस टीम ने डॉ. रैना ए मोहंती से खास बातचीत की, जिन्होंने इसके पीछे के कारणों और देखभाल के तरीकों को विस्तार से समझाया।
सफेद दांतों का रहस्य: जेनेटिक नहीं, आदतें महत्वपूर्ण
डॉ. रैना के अनुसार दांतों की सफेदी में कोई खास जेनेटिक या क्षेत्रीय कारण नहीं होता। दक्षिण भारतीयों के दांत सफेद दिखते हैं इसलिए क्योंकि उनकी डाइट, ओरल हाइजीन और पारंपरिक दंत देखभाल की आदतें खास होती हैं। दांतों पर दाग कम लगते हैं और देखभाल के चलते सफेदी बरकरार रहती है, न कि केवल जेनेटिक वजह से।
दक्षिण भारत के खाने में ताजा घर का बना भोजन, इडली, डोसा, नारियल से बने व्यंजन, करी पत्ता और दालें शामिल होती हैं। ये खाद्य पदार्थ पाचन प्रणाली और मुंह दोनों के स्वास्थ्य के लिए लाभकारी हैं। प्रोसेस्ड और चीनी वाले खाद्य पदार्थों की तुलना में ये प्राकृतिक भोजन दांतों की सफेदी को बनाए रखने में मदद करते हैं।
ऑयल पुलिंग और देखभाल के तरीके
दक्षिण भारतीय परिवारों में नारियल या तिल के तेल से ऑयल पुलिंग की परंपरा अब भी जारी है। नियमित तेल कुल्ला करने से मुंह में मौजूद बैक्टीरिया कम होते हैं और मसूड़ों की सफाई बेहतर होती है। इससे दांतों पर जमा प्लाक कम होता है, जो सफेदी और दांतों के स्वास्थ्य के लिए अच्छा है।
डॉ. रैना का कहना है कि दांतों का प्राकृतिक रंग पूरी तरह सफेद होना आवश्यक नहीं। स्वस्थ दांत हल्के पीले रंग के होते हैं, जो अंदर की डेंटिन परत की वजह से होता है। किसी व्यक्ति के दांतों का रंग उसकी जीवनशैली, खान-पान और पर्यावरण से जुड़ी आदतों पर निर्भर करता है।
धूम्रपान, तंबाकू का सेवन, ज्यादा चाय-च кофе पीना और मुंह की गंदी सफाई दांतों के रंग को खराब कर देते हैं। दांतों का पीला होना आमतौर पर इन आदतों और दाग धब्बों के कारण होता है।
स्वस्थ दांतों के लिए फ्लोराइड युक्त टूथपेस्ट से दिन में दो बार ब्रशिंग जरूरी है। साथ ही फ्लॉसिंग को अपनी दिनचर्या में शामिल करें और दिनभर पर्याप्त पानी पिएं। सेब, गाजर, खीरा जैसे कुरकुरे फल और सब्जियां खाने से भी दांत मजबूत और सफेद रहते हैं। कैल्शियम और विटामिन डी युक्त खाद्य पदार्थ लेना भी आवश्यक है।
डॉ. रैना ने लोगों को नींबू-नमक या पाउडर सोडा जैसे घरेलू और वायरल ट्रिक्स से बचने की सलाह दी है, क्योंकि ये दांतों को नुकसान पहुंचा सकती हैं। इसके बजाय नियमित दांतों की जांच कराना चाहिए ताकि शुरुआती स्टेज में ही कैविटी और मसूड़े की बीमारियों से बचा जा सके।
इस प्रकार, दक्षिण भारत वालों के चमकदार और सफेद दांत केवल उनकी शैली भोजन, पारंपरिक देखभाल और साफ-सफाई के कारण होते हैं न कि कोई जीन या क्षेत्रीय वजह। अगर हम उनकी आदतों को अपनाएं और सही देखभाल करें तो हमारे दांत भी स्वस्थ और चमकदार रह सकते हैं।
