नई दिल्ली, दिल्ली
कांग्रेस ने चुनाव आयोग की विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर (Special Intensive Revision) प्रक्रिया को लेकर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर आयोग की ओर से प्रस्तावित उपाय इस बात की स्वीकारोक्ति हैं कि पूरी प्रक्रिया गंभीर रूप से विफल रही है। उन्होंने आयोग के हालिया प्रेस नोट को केवल ‘डैमेज कंट्रोल’ का प्रयास बताया।
जयराम रमेश ने कहा कि एसआईआर के दौरान सूची से हटाए गए या हटाए जाने के जोखिम वाले मतदाताओं को लेकर अब जो कदम उठाए जा रहे हैं, वे बड़े पैमाने पर मताधिकार से जुड़े सवालों का समाधान करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं। उन्होंने दावा किया कि आयोग जिन मतदाताओं के लिए अब घर-घर जाकर संपर्क करने की बात कर रहा है, उनके सत्यापन के दौरान पहले पर्याप्त प्रयास नहीं किए गए थे।
5.43 करोड़ मतदाताओं को लेकर कांग्रेस ने उठाए सवाल
जयराम रमेश के अनुसार, करीब 5.43 करोड़ मतदाता ऐसे हैं जिनके नाम मतदाता सूची से हटाए जाने के जोखिम में बताए जा रहे हैं। कांग्रेस नेता ने कहा कि अब इन मतदाताओं के घरों तक बूथ लेवल ऑफिसर्स यानी बीएलओ को भेजने की बात कही जा रही है।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब पहले घर-घर जाकर सत्यापन की प्रक्रिया चल रही थी, तब बीएलओ के दौरे पर्याप्त और व्यापक क्यों नहीं थे। रमेश का कहना है कि यदि पहली प्रक्रिया ठीक तरीके से नहीं हुई, तो उसी व्यवस्था को दोबारा दोहराने से समस्या का समाधान कैसे होगा।
14 करोड़ नाम हटाए जाने का दावा
कांग्रेस महासचिव ने यह भी दावा किया कि एसआईआर के तीनों चरणों में अब तक लगभग 14 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। उन्होंने आयोग की उस व्यवस्था पर भी सवाल उठाया जिसके तहत प्रभावित लोगों को दोबारा मतदाता सूची में शामिल होने के लिए आवेदन करना होगा।
रमेश ने इसे मतदाताओं के अधिकारों को लेकर गंभीर स्थिति बताते हुए कहा कि पहले बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाएं और उसके बाद उन्हीं लोगों से दोबारा सूची में शामिल होने के लिए आवेदन मांगा जाए, यह प्रक्रिया उचित नहीं है।
भाजपा को फायदा पहुंचाने का लगाया आरोप
जयराम रमेश ने चुनाव आयोग पर गंभीर राजनीतिक आरोप भी लगाए। उन्होंने दावा किया कि भाजपा को फायदा पहुंचाने के लिए हाशिए पर मौजूद मतदाताओं के नाम लक्षित तरीके से हटाए गए हैं। हालांकि, यह कांग्रेस की ओर से लगाया गया राजनीतिक आरोप है और दिए गए इनपुट में इसके समर्थन में स्वतंत्र प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं।
कांग्रेस नेता ने ईसी-आइनेट सॉफ्टवेयर के कथित दुरुपयोग को लेकर भी सवाल उठाए और आरोप लगाया कि चुनाव आयोग ने इस मुद्दे पर पर्याप्त स्पष्टीकरण नहीं दिया है।
कांग्रेस का कहना है कि मतदाता सूची से जुड़े किसी भी पुनरीक्षण में पारदर्शिता, उचित सत्यापन और मतदाताओं को पर्याप्त अवसर मिलना जरूरी है। वहीं, जयराम रमेश ने आयोग के मौजूदा कदमों को समस्या के मूल समाधान के बजाय नुकसान की भरपाई करने की कोशिश बताया है।
एसआईआर को लेकर कांग्रेस और चुनाव आयोग के बीच विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब मतदाता सूची के पुनरीक्षण, नामों के सत्यापन और मतदाताओं के अधिकारों को लेकर राजनीतिक बहस तेज है। इस मुद्दे पर आने वाले समय में चुनाव आयोग के स्पष्टीकरण और राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाओं पर नजर रहेगी।
