नई दिल्ली, भारत
सुप्रीम कोर्ट ने छह साल की सौतेली बेटी के यौन शोषण और हत्या के दोषी की मौत की सजा को उम्रकैद में बदल दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि दोषी को अब अपनी बाकी जिंदगी जेल में बितानी होगी और उसे किसी तरह की छूट नहीं मिलेगी।
जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस विजय बिश्नोई की पीठ ने मामले की सुनवाई की। पीठ ने पीड़िता की मां की गवाही को विश्वसनीय माना और कहा कि घरेलू हिंसा या यौन उत्पीड़न झेलने वाली महिला का तुरंत शिकायत न करना उसकी गवाही को अविश्वसनीय बनाने का आधार नहीं हो सकता।
मामले में सत्र अदालत ने छह वर्षीय बच्ची के बार-बार यौन शोषण और गला घोंटकर हत्या के मामले में सौतेले पिता को मौत की सजा सुनाई थी। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर पीठ ने नवंबर 2019 में इस सजा को बरकरार रखा था। इसके बाद दोषी ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया।
मां की गवाही पर उठाए थे सवाल
दोषी की ओर से दलील दी गई थी कि उसकी पत्नी ने लंबे समय तक घटना की शिकायत नहीं की, इसलिए उसकी गवाही के आधार पर सजा नहीं दी जानी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया।
पीठ ने कहा कि हिंसा का सामना करने वाली महिलाओं की चुप्पी असामान्य व्यवहार नहीं है। अदालत ने NFHS-5 के आंकड़ों का उल्लेख करते हुए कहा कि हिंसा का सामना करने वाली बड़ी संख्या में महिलाएं किसी से मदद नहीं मांगतीं।
अदालत ने कहा कि किसी पीड़ित या गवाह के व्यवहार को परखने का कोई एक तय मॉडल नहीं हो सकता।
पीठ ने महिला की परिस्थितियों का भी उल्लेख किया। अदालत के अनुसार, वह आर्थिक रूप से निर्भर थी और घरेलू परिस्थितियों के कारण उसके लिए पुलिस तक पहुंचना आसान नहीं था।
हालांकि अदालत ने अपराध को बेहद गंभीर माना, लेकिन दोषी की परिस्थितियों और सुधार की संभावना को देखते हुए मृत्युदंड को उम्रकैद में बदल दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि यह उम्रकैद उसकी शेष प्राकृतिक जिंदगी तक प्रभावी रहेगी।
