UNHRC में भारत का पाकिस्तान पर हमला, कहा- आतंकवाद और पाखंड से नहीं सुधरेगी बदहाल अर्थव्यवस्था

जिनेवा, स्विट्जरलैंड

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) के मंच से भारत ने पाकिस्तान को आतंकवाद, जम्मू-कश्मीर और आर्थिक संकट के मुद्दे पर कड़ा जवाब दिया है। भारत ने कहा कि पाकिस्तान को दूसरे देशों की जमीन पर नजर रखने और सीमा पार आतंकवाद को बढ़ावा देने के बजाय अपनी चरमराती अर्थव्यवस्था तथा घरेलू समस्याओं पर ध्यान देना चाहिए।

भारतीय राजनयिक क्षितिज त्यागी ने पाकिस्तान की प्राथमिकताओं पर सवाल उठाते हुए कहा कि आतंकवाद और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर की जाने वाली बयानबाजी से आर्थिक संकट का समाधान नहीं हो सकता। भारत ने यह संदेश ऐसे समय दिया है जब पाकिस्तान आर्थिक चुनौतियों से जूझ रहा है और बाहरी वित्तीय सहायता पर उसकी निर्भरता को लेकर लगातार चर्चा होती रही है।

पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर का मुद्दा उठा

भारत ने पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर के हिस्सों में मानवाधिकारों की स्थिति का मुद्दा भी उठाया। भारतीय पक्ष ने आरोप लगाया कि वहां भोजन, ईंधन और दवाइयों जैसी आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता प्रभावित हो रही है। इसके अलावा शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कथित बल प्रयोग का भी उल्लेख किया गया।

भारत ने एक बार फिर स्पष्ट किया कि जम्मू-कश्मीर देश का अभिन्न और अखंड हिस्सा है। भारत ने पाकिस्तान से उसके कब्जे वाले क्षेत्रों को खाली करने की मांग दोहराई।

आतंकवाद को लेकर पाकिस्तान पर निशाना

भारत ने पाकिस्तान पर आतंकवादी और प्रॉक्सी नेटवर्कों को समर्थन देने का आरोप लगाया। भारतीय पक्ष ने कहा कि इन नेटवर्कों की हिंसा का असर किसी एक धर्म या समुदाय तक सीमित नहीं रहा है। आतंकवादी गतिविधियों में निर्दोष लोगों की जान गई है, जिनमें मुस्लिम समुदाय के लोग भी शामिल हैं।

भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने यह संदेश रखने की कोशिश की कि आतंकवाद को राजनीतिक उद्देश्य हासिल करने के साधन के रूप में स्वीकार नहीं किया जा सकता।

सिंधु जल संधि पर भी भारत ने दिया जवाब

सिंधु जल संधि को लेकर पाकिस्तान के दावों पर भी भारत ने प्रतिक्रिया दी। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में पाकिस्तान द्वारा प्रसारित एक पत्र का उल्लेख करते हुए मध्यस्थता न्यायालय के फैसले के संदर्भ में भारत की स्थिति स्पष्ट की।

भारत ने संबंधित मध्यस्थता प्रक्रिया की वैधता पर सवाल उठाया और कहा कि पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय कानूनी तंत्र तथा तथ्यों को अपने पक्ष में प्रस्तुत करने की कोशिश कर रहा है।

भारत का कहना है कि सिंधु जल संधि से जुड़े विवादों पर पाकिस्तान द्वारा पेश किए जा रहे दावों को कानूनी और तथ्यात्मक स्थिति के आधार पर देखा जाना चाहिए।

जिनेवा में भारत की प्रतिक्रिया से स्पष्ट है कि जम्मू-कश्मीर, आतंकवाद और सिंधु जल संधि को लेकर दोनों देशों के बीच कूटनीतिक मतभेद अभी भी गहरे हैं। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर दोनों पक्ष लगातार अपने-अपने दावों और आपत्तियों को सामने रख रहे हैं।

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