नई दिल्ली, दिल्ली
चुनाव आयोग के आयुक्तों के बीच कथित मतभेद को लेकर चल रहे विवाद के बीच भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने आयोग का बचाव किया है। बीजेपी सांसद और पार्टी के वरिष्ठ नेता संबित पात्रा ने कहा कि तीनों चुनाव आयुक्तों के बीच आधिकारिक तौर पर विचारों का आदान-प्रदान और आपसी बातचीत होना स्वस्थ लोकतंत्र की निशानी है। उन्होंने कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों पर संवैधानिक संस्थाओं को निशाना बनाने का आरोप लगाया।
तीनों चुनाव आयुक्तों के बीच 14 बार हुई बातचीत
प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए संबित पात्रा ने चुनाव आयोग की ओर से जारी प्रेस नोट का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि प्रेस नोट के अनुसार तीनों चुनाव आयुक्तों के बीच 14 बार आधिकारिक बातचीत हुई थी।
पात्रा ने कहा कि वह चुनाव आयोग की ओर से प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं कर रहे हैं, बल्कि आयोग द्वारा जारी दस्तावेज का हवाला दे रहे हैं। उनके मुताबिक, चुनाव आयुक्तों के बीच हुई बातचीत से यह स्पष्ट होता है कि उन्होंने विभिन्न मुद्दों पर अपने विचार साझा किए और एक-दूसरे से सलाह-मशविरा किया।
‘ऐसी बातचीत स्वस्थ लोकतंत्र की निशानी’
बीजेपी नेता ने कहा कि तीनों चुनाव आयुक्तों के बीच आधिकारिक बातचीत होना कोई असामान्य बात नहीं है। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था का स्वाभाविक हिस्सा बताते हुए कहा कि आयोग के भीतर विचार-विमर्श और संवाद संस्थागत कामकाज का हिस्सा है।
पात्रा ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि अगर संवैधानिक संस्था के अधिकारी आपस में बातचीत नहीं करते, अपने विचार साझा नहीं करते और केवल एक-दूसरे की बात मानते रहते हैं, तो विपक्ष इसे भी गलत तरीके से पेश कर सकता है।
विपक्ष पर संवैधानिक संस्थाओं को निशाना बनाने का आरोप
संबित पात्रा ने आरोप लगाया कि विपक्षी दल चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर लगातार सवाल उठाते रहे हैं। उन्होंने कहा कि जब तीनों चुनाव आयुक्त किसी मुद्दे पर सहमत दिखाई देते हैं, तब भी विपक्ष सवाल उठाता है और जब उनके बीच विचार-विमर्श की जानकारी सामने आती है, तब भी सवाल खड़े किए जाते हैं।
उन्होंने विपक्ष के उस रुख पर भी सवाल उठाया जिसमें चुनाव आयोग के अधिकारियों की स्वतंत्र भूमिका और निर्णय प्रक्रिया को लेकर लगातार आरोप लगाए जा रहे हैं। पात्रा के मुताबिक, संवैधानिक संस्थाओं की कार्यप्रणाली को राजनीतिक विवाद का विषय बनाना लोकतांत्रिक संस्थाओं के लिए उचित नहीं है।
मीडिया के बाद चुनाव आयोग पर भी आरोप लगाने का दावा
बीजेपी नेता ने विपक्ष द्वारा मीडिया के एक वर्ग के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले ‘गोदी मीडिया’ जैसे शब्दों का भी जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि अब इसी तरह के आरोप चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था के खिलाफ भी लगाए जा रहे हैं।
बीजेपी की यह प्रतिक्रिया उस मीडिया रिपोर्ट के बाद आई है, जिसमें दावा किया गया था कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने देशभर में मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिविजन के दौरान नाम हटाने सहित कई मुद्दों पर चिंता व्यक्त की थी।
इस विवाद के बीच बीजेपी ने चुनाव आयोग की आंतरिक बातचीत को सामान्य संस्थागत प्रक्रिया बताया है। वहीं, विपक्ष की ओर से उठाए गए सवालों ने चुनाव आयोग की निर्णय प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों पर राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है।
