नई दिल्ली, दिल्ली
उत्तर प्रदेश की 69000 सहायक शिक्षक भर्ती का विवाद एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। मंगलवार को मामले की सुनवाई के दौरान नौकरी कर रहे सामान्य वर्ग के शिक्षकों की ओर से वरिष्ठ वकील शोभा गुप्ता ने दलीलें पेश कीं। उन्होंने इलाहाबाद हाई कोर्ट की खंडपीठ के फैसले का विरोध करते हुए कहा कि उनके मुवक्किलों का चयन नियमों के अनुसार हुआ है।
सामान्य वर्ग के शिक्षकों की ओर से अदालत में आरक्षित वर्ग को मिले लाभ को लेकर सवाल उठाया गया। वरिष्ठ वकील ने आरोप लगाया कि आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों ने आरक्षण का दोहरा लाभ लिया। दलील दी गई कि आरक्षित वर्ग को टीईटी में आयु सीमा, परीक्षा शुल्क और न्यूनतम पासिंग अंक समेत कई छूट मिली थीं। इसके बाद सहायक अध्यापक लिखित परीक्षा में भी उन्हें छूट का लाभ मिला।
दलील में कहा गया कि लिखित परीक्षा में मिली यह छूट महज रिलैक्सेशन नहीं है, बल्कि आरक्षण का एक रूप है। सामान्य वर्ग के नौकरी कर रहे शिक्षकों ने अपने चयन को सही बताते हुए हाई कोर्ट के आदेश का विरोध किया है।
मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति एसवीएन भट्टी और न्यायमूर्ति एनवी अंजारियों की पीठ कर रही है। सुप्रीम कोर्ट के सामने इलाहाबाद हाई कोर्ट की खंडपीठ के 13 अगस्त 2024 के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाएं हैं।
हाई कोर्ट की खंडपीठ ने 69000 सहायक शिक्षक भर्ती की चयन सूची को रद्द कर दिया था। अदालत ने उत्तर प्रदेश सरकार को तीन महीने के भीतर नई मेरिट सूची तैयार करने का निर्देश दिया था। नई सूची में बेसिक शिक्षा नियमावली 1981 और आरक्षण नियमावली 1994 के प्रावधानों का पालन करने को कहा गया था।
सुप्रीम कोर्ट ने मामले की शुरुआती सुनवाई में हाई कोर्ट के फैसले पर अंतरिम रोक लगा दी थी। इस मामले में सामान्य वर्ग के नौकरी कर रहे शिक्षकों के साथ-साथ आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों ने भी हस्तक्षेप अर्जी दाखिल की है।
मंगलवार को मामले की मेरिट पर विस्तार से बहस हुई। सामान्य वर्ग की ओर से वरिष्ठ वकील शोभा गुप्ता ने भर्ती प्रक्रिया और इससे जुड़े विभिन्न अदालती फैसलों का सिलसिलेवार ब्योरा भी अदालत के सामने रखा। मामले में बुधवार को भी सुनवाई जारी रहेगी।
