बिश्केक, किर्गिस्तान\
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन सोमवार को किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में द्विपक्षीय बैठक करेंगे। दोनों नेताओं की यह मुलाकात शंघाई सहयोग संगठन के शिखर सम्मेलन के दौरान हो रही है। बैठक में भारत-रूस रणनीतिक साझेदारी की समीक्षा के साथ ऊर्जा, उर्वरक, व्यापार, रक्षा और वैश्विक मुद्दों पर बातचीत होने की संभावना है।
भारत और रूस के बीच ऊर्जा सहयोग इस बैठक का सबसे महत्वपूर्ण आर्थिक विषय हो सकता है। रूस भारत के प्रमुख कच्चे तेल आपूर्तिकर्ताओं में शामिल है और उर्वरक आपूर्ति भी दोनों देशों के आर्थिक संबंधों का अहम हिस्सा है। हाल ही में विदेश मंत्री एस. जयशंकर की मॉस्को यात्रा के दौरान राष्ट्रपति पुतिन ने ऊर्जा और उर्वरक के साथ परमाणु ऊर्जा तथा उच्च तकनीक सहयोग को प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में बताया था।
ऐसे में मोदी और पुतिन की बातचीत में लंबी अवधि की ऊर्जा साझेदारी और उर्वरक आपूर्ति को स्थिर रखने के उपायों पर चर्चा हो सकती है। भारत के लिए यह मुद्दा खास तौर पर महत्वपूर्ण है, क्योंकि वैश्विक बाजार में ऊर्जा और खाद की कीमतों तथा आपूर्ति पर अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों का असर पड़ता है।
व्यापार असंतुलन भी बातचीत का अहम हिस्सा रहेगा। भारत और रूस के बीच व्यापार तेजी से बढ़ा है, लेकिन इसमें रूसी ऊर्जा उत्पादों की हिस्सेदारी काफी अधिक है। भारत चाहता है कि रूस भारतीय उत्पादों के लिए अपने बाजार में ज्यादा अवसर खोले। फार्मा, आईटी, कृषि और उपभोक्ता वस्तुओं के निर्यात को बढ़ाने पर विशेष जोर दिया जा सकता है।
रक्षा सहयोग में एस-400 वायु रक्षा प्रणाली से जुड़े मुद्दे चर्चा में आ सकते हैं। इसके अलावा रक्षा उपकरणों की आपूर्ति, स्पेयर पार्ट्स, रखरखाव और भारत में मरम्मत सुविधाओं को मजबूत करने जैसे विषय भी उठ सकते हैं। हालांकि, इन मुद्दों पर बातचीत की संभावना को किसी अंतिम समझौते के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
दोनों देशों के बीच भुगतान व्यवस्था भी महत्वपूर्ण है। पश्चिमी वित्तीय प्रतिबंधों और बदलते वैश्विक व्यापार वातावरण के बीच भारत और रूस के लिए सुरक्षित तथा व्यावहारिक भुगतान व्यवस्था बनाए रखना जरूरी है।
मोदी-पुतिन की बैठक क्षेत्रीय और वैश्विक घटनाक्रम के लिहाज से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। यूक्रेन और पश्चिम एशिया की स्थिति सहित अन्य अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर दोनों नेता विचार साझा कर सकते हैं।
दोनों नेताओं की अगली महत्वपूर्ण मुलाकात सितंबर में नई दिल्ली में प्रस्तावित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान भी होने की संभावना है।
