मुंबई, महाराष्ट्र
भारतीय रिजर्व बैंक ने वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता और कच्चे तेल की कीमतों में अस्थिरता को भारतीय अर्थव्यवस्था के सामने मौजूद प्रमुख जोखिमों में शामिल किया है। हालांकि केंद्रीय बैंक का आकलन है कि भारतीय अर्थव्यवस्था फिलहाल मजबूत स्थिति में है, लेकिन तेल की कीमतों में अचानक तेजी और महंगाई के व्यापक रूप से बढ़ने की स्थिति में मौद्रिक नीति को सख्त करना पड़ सकता है।
3 से 5 अगस्त 2026 के बीच हुई मौद्रिक नीति समिति की बैठक में रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया गया। बैठक के बाद जारी विचारों में MPC सदस्यों ने वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों और ऊर्जा बाजार से जुड़े जोखिमों पर चिंता जताई।
पश्चिम एशिया संघर्ष से तेल बाजार पर दबाव
RBI के मुताबिक, पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष वैश्विक तेल बाजार के लिए महत्वपूर्ण जोखिम बना हुआ है। क्षेत्र में तनाव बढ़ने पर कच्चे तेल की कीमतों में अचानक उछाल आ सकता है। इससे ऊर्जा लागत बढ़ने के साथ महंगाई पर भी दबाव पड़ सकता है।
समिति ने कहा कि शेयर बाजारों में उतार-चढ़ाव, लगातार महंगाई की चिंता और प्रमुख वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं की कमजोर सार्वजनिक वित्तीय स्थिति पहले से ही आर्थिक माहौल को प्रभावित कर रही है। ऊर्जा कीमतों और आपूर्ति श्रृंखला से जुड़े जोखिम भी चुनौती बने हुए हैं।
भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में तेज बदलाव का सीधा असर घरेलू अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
6.7 प्रतिशत की वृद्धि दर से मजबूत दिखी अर्थव्यवस्था
RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि पश्चिम एशिया में संघर्ष, वैश्विक अनिश्चितता और अनियमित मानसून जैसी परिस्थितियों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था अच्छी स्थिति में है। 6.7 प्रतिशत की वृद्धि दर को उन्होंने अर्थव्यवस्था की मजबूती का संकेत बताया।
हालांकि, महंगाई को लेकर केंद्रीय बैंक सतर्क है। वर्तमान दबाव मुख्य रूप से खाद्य और ईंधन जैसी आपूर्ति संबंधी वजहों से जुड़ा हुआ है। RBI का मानना है कि ब्याज दर में बदलाव करने से पहले महंगाई के भविष्य के रुख को लेकर अधिक स्पष्टता जरूरी है।
व्यापक महंगाई बनी तो सख्त होगा रुख
RBI ने यह भी चेताया कि खाद्य वस्तुओं, ईंधन और अन्य कच्चे माल की कीमतों में बढ़ोतरी आगे चलकर व्यापक महंगाई का रूप ले सकती है। यदि ऐसा होता है तो मौद्रिक नीति के रुख को सख्त करने की जरूरत पड़ सकती है।
फिलहाल केंद्रीय बैंक ने दरों में बदलाव से परहेज करते हुए स्थिति पर नजर रखने का रुख अपनाया है। आने वाले महीनों में कच्चे तेल की कीमतें, पश्चिम एशिया का घटनाक्रम और घरेलू महंगाई RBI की नीति के लिए अहम कारक बने रहेंगे।
