जिन्ना की जानलेवा बीमारी छिपाने वाले मुंबई के दो डॉक्टरों को मिलेगा पाकिस्तान का सर्वोच्च सम्मान

Mumbai, Maharashtra

मुंबई के दो पारसी डॉक्टर एक बार फिर इतिहास के एक बेहद चर्चित अध्याय के कारण चर्चा में हैं। डॉ. जल रतनजी पटेल और रेडियोलॉजिस्ट डॉ. जल धायभो-कू को पाकिस्तान के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में शामिल ‘निशान-ए-इम्तियाज’ से मरणोपरांत सम्मानित किए जाने की जानकारी सामने आई है। यह सम्मान मार्च 2027 में दिए जाने की योजना बताई गई है।

दोनों डॉक्टरों का नाम मुहम्मद अली जिन्ना की गंभीर बीमारी को गोपनीय रखने की ऐतिहासिक घटना से जुड़ा रहा है। जिन्ना पाकिस्तान के संस्थापक थे और 1947 में भारत के विभाजन के समय वे मुस्लिम लीग के प्रमुख नेताओं में शामिल थे।

ऐतिहासिक विवरणों के अनुसार, डॉ. जल रतनजी पटेल जिन्ना का इलाज करते थे। जिन्ना लंबे समय से स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे थे और उन्हें तपेदिक यानी टीबी था। डॉ. पटेल ने उनके स्वास्थ्य की गंभीर स्थिति को सार्वजनिक नहीं किया। रेडियोलॉजिस्ट डॉ. जल धायभो-कू के बारे में भी उपलब्ध विवरण बताते हैं कि जिन्ना की बीमारी से संबंधित मेडिकल रिकॉर्ड और एक्स-रे को बेहद गोपनीय रखा गया था।

जिन्ना की बीमारी को लेकर यह विषय इसलिए महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि उनकी वास्तविक स्वास्थ्य स्थिति तत्कालीन राजनीतिक नेतृत्व से काफी हद तक छिपी रही। बाद के इतिहासकारों और लेखकों ने इस बात पर चर्चा की कि यदि जिन्ना की बीमारी की गंभीरता पहले सार्वजनिक हो जाती, तो भारत के विभाजन को लेकर राजनीतिक बातचीत का स्वरूप बदल सकता था।

हालांकि, इतिहासकारों के बीच यह निष्कर्ष निश्चित नहीं है कि जिन्ना की बीमारी सामने आने से विभाजन रुक जाता। यह एक संभावित ऐतिहासिक परिकल्पना है, जिसे कुछ पुस्तकों और लेखों में चर्चा का विषय बनाया गया है।

डॉ. जल रतनजी पटेल का भारतीय चिकित्सा क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण योगदान रहा। भारत सरकार के आधिकारिक पद्म पुरस्कार रिकॉर्ड में उनका नाम दर्ज है और उन्हें 1962 में पद्म भूषण प्रदान किया गया था।

इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर भारत-पाकिस्तान विभाजन के दौर में चिकित्सा गोपनीयता, राजनीतिक परिस्थितियों और इतिहास के बीच संबंध को चर्चा में ला दिया है।

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