भारत से रिश्ते नहीं बिगाड़ना चाहता बांग्लादेश, तीस्ता विवाद पर जल संसाधन मंत्री ने दिया बड़ा बयान

ढाका, बांग्लादेश

भारत और बांग्लादेश के बीच तीस्ता नदी के पानी के बंटवारे का मुद्दा लंबे समय से दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों में अहम बना हुआ है। इस विवाद के बीच बांग्लादेश के जल संसाधन मंत्री शाहिदुद्दीन चौधरी अनी ने ऐसा बयान दिया है, जिसे दोनों देशों के संबंधों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश भारत के साथ अपने दोस्ताना रिश्तों को खराब नहीं करना चाहता।

ढाका में एक कार्यक्रम के दौरान मंत्री ने कहा कि भारत बांग्लादेश का पड़ोसी और मित्र देश है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के अपने-अपने हित हैं और भारत को अपने हितों के साथ बांग्लादेश के हितों को भी ध्यान में रखना चाहिए। उनके मुताबिक, मित्र देशों के बीच एक-दूसरे के हितों का सम्मान किया जाना जरूरी है।

मंत्री का यह बयान तीस्ता नदी से जुड़े विवाद के संदर्भ में आया है। तीस्ता नदी भारत और बांग्लादेश दोनों के लिए महत्वपूर्ण है। खासतौर पर बांग्लादेश में नदी के पानी का इस्तेमाल कृषि और सिंचाई के लिए बड़े पैमाने पर होता है। सूखे मौसम में पानी की उपलब्धता को लेकर बांग्लादेश लंबे समय से चिंता जताता रहा है।

हालांकि, बांग्लादेश की ओर से तीस्ता को लेकर अपनी मांगें छोड़े जाने का कोई संकेत नहीं दिया गया है। मंत्री के बयान का मुख्य जोर इस बात पर रहा कि पानी से जुड़े मतभेद दोनों देशों के पारंपरिक संबंधों को प्रभावित न करें।

बांग्लादेश सरकार ने तीस्ता नदी के व्यापक प्रबंधन के लिए एक मास्टर प्लान तैयार करने की दिशा में भी कदम बढ़ाए हैं। जून में मंत्री ने कहा था कि तीस्ता मास्टर प्लान को आगे बढ़ाने की तैयारी हो चुकी है और परियोजना को घरेलू वित्त पोषण के साथ स्थानीय तथा विदेशी तकनीकी सहायता से लागू करने की योजना है।

इस योजना का उद्देश्य केवल पानी के इस्तेमाल तक सीमित नहीं है। नदी प्रबंधन, बाढ़ नियंत्रण, कटाव रोकने, कृषि और नदी के आसपास के क्षेत्रों के विकास को भी इसमें शामिल किया जा रहा है। जुलाई में बांग्लादेशी संसद में दी गई जानकारी के अनुसार प्रस्तावित योजना में नदी तट संरक्षण, ड्रेजिंग और बाढ़ नियंत्रण तटबंध जैसे काम शामिल हैं।

भारत और बांग्लादेश के बीच तीस्ता जल बंटवारे पर अंतिम समझौता अब तक नहीं हो पाया है। ऐसे में अनी का बयान दोनों देशों के बीच संवाद को जारी रखने की इच्छा के रूप में देखा जा रहा है।

उनके संदेश का सार यही है कि बांग्लादेश अपने जल हितों की रक्षा चाहता है, लेकिन तीस्ता विवाद को भारत के साथ दोस्ताना रिश्तों के लिए बाधा नहीं बनने देना चाहता।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!