कीव, यूक्रेन
रूस-यूक्रेन युद्ध में सैन्य और आर्थिक ठिकानों पर हमले लगातार तेज हो रहे हैं। इसी क्रम में रूस ने यूक्रेन के दक्षिणी हिस्से में स्थित ओडेसा और डेन्यूब नदी के किनारे बसे इजमाइल बंदरगाह को निशाना बनाया। हमलों के बाद बंदरगाह क्षेत्र में आग लगने और कई ढांचों को नुकसान पहुंचने की खबर सामने आई है। ओडेसा क्षेत्र के बंदरगाह यूक्रेन की अर्थव्यवस्था और निर्यात व्यवस्था के लिए बेहद अहम हैं। हाल के समय में इन बंदरगाहों पर लगातार रूसी हमले हुए हैं।
रूस ने इन हमलों को सैन्य अभियान का हिस्सा बताया है। रूसी पक्ष के अनुसार, ओडेसा और इजमाइल में उन स्थानों को निशाना बनाया गया जहां यूक्रेन की सेना के लिए सामान रखा जा रहा था। मॉस्को ने दावा किया कि पश्चिमी देशों से हथियार लेकर पहुंचे जहाज और उनके भंडारण केंद्र भी हमले की जद में आए। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की गई है।
इजमाइल बंदरगाह की भूमिका युद्ध के दौरान और अधिक महत्वपूर्ण हुई है। ब्लैक सी के कई मार्गों पर सुरक्षा संबंधी जोखिम बढ़ने के बाद यूक्रेन के लिए डेन्यूब क्षेत्र से व्यापार जारी रखना अहम हो गया है। इसलिए बंदरगाह पर होने वाला कोई भी बड़ा हमला देश के निर्यात और आपूर्ति व्यवस्था को प्रभावित कर सकता है।
रूस ने जमीनी मोर्चे पर भी सफलता का दावा किया है। रूसी अधिकारियों के मुताबिक, उसकी सेना ने जपोरीजिया और डोनेस्क क्षेत्रों में यूक्रेन के दो ठिकानों पर कब्जा किया है। हालांकि, युद्धक्षेत्र से आने वाली सूचनाओं की स्वतंत्र पुष्टि कठिन होती है और दोनों पक्ष अपने-अपने दावे करते रहे हैं।
उधर, यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की के गृह नगर क्रिवीरीह में स्थित आर्सेलर मित्तल स्टील प्लांट पर रूसी मिसाइल हमले में मृतकों की संख्या बढ़कर दो हो गई है। हमले में पहले एक व्यक्ति की मौत और 13 लोगों के घायल होने की सूचना थी। बाद में घायलों में से एक की मौत हो गई।
आर्सेलर मित्तल का क्रिवीरीह संयंत्र यूक्रेन के प्रमुख इस्पात उत्पादन केंद्रों में है। यह भारतीय उद्योगपति लक्ष्मी निवास मित्तल के कारोबारी समूह से जुड़ा है। हमले के बाद संयंत्र में उत्पादन कुछ समय के लिए प्रभावित हुआ, लेकिन कंपनी ने सामान्य गतिविधियां बहाल करने के प्रयास शुरू किए।
कंपनी ने हमले की निंदा की और इसे शत्रुतापूर्ण कार्रवाई बताया। रूस और यूक्रेन के बीच जारी हमलों के कारण औद्योगिक उत्पादन, ऊर्जा आपूर्ति और व्यापारिक ढांचे पर दबाव लगातार बढ़ रहा है।
