नई दिल्ली, दिल्ली
‘वंदे मातरम्’ के कथित अपमान को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की ओर से कांग्रेस से माफी की मांग किए जाने के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस ने शाह की मांग पर पलटवार करते हुए आरोप लगाया कि सरकार अपनी नाकामियों से जनता का ध्यान हटाने के लिए इस मुद्दे को तूल दे रही है।
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने अमित शाह पर निशाना साधते हुए कहा कि गृह मंत्री का यह रुख अपनी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार की कथित नाकामियों से लोगों का ध्यान भटकाने की कोशिश है। उन्होंने शाह की राजनीतिक विचारधारा और संसद में दिए गए उनके पुराने बयानों को लेकर भी सवाल उठाए।
जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि अमित शाह ने 17 दिसंबर 2024 को राज्यसभा में संविधान निर्माता डॉ. भीमराव आंबेडकर के प्रति आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। कांग्रेस नेता ने इसी संदर्भ में शाह से सवाल किया कि जब विपक्षी दलों से माफी की मांग की जा रही है, तो सरकार को अपने विवादित बयानों पर भी जवाब देना चाहिए।
रमेश ने राष्ट्रीय ध्वज को लेकर भी शाह और उनके वैचारिक संगठन पर निशाना साधा। उन्होंने दावा किया कि संबंधित संगठन ने लंबे समय तक अपने मुख्यालय पर तिरंगा नहीं फहराया। कांग्रेस नेता ने इस मुद्दे को राष्ट्रवाद की राजनीति से जोड़ते हुए भाजपा पर सवाल खड़े किए।
कांग्रेस के प्रवक्ता पवन खेड़ा ने भी ‘वंदे मातरम्’ को लेकर पार्टी का पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस का स्वतंत्रता आंदोलन और ‘वंदे मातरम्’ का इतिहास आपस में गहराई से जुड़ा रहा है। खेड़ा ने दावा किया कि कांग्रेस ने इस गीत के माध्यम से स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान लोगों में देशभक्ति और आजादी की भावना को मजबूत किया।
वहीं, भाजपा की ओर से कांग्रेस पर राष्ट्रगान और राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान को लेकर सवाल उठाए जाते रहे हैं। अमित शाह ने विपक्ष से ‘वंदे मातरम्’ के कथित अपमान पर सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की है।
‘वंदे मातरम्’ को लेकर जारी यह विवाद अब राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का मुद्दा बन गया है। दोनों प्रमुख दल इस मामले को लेकर अपने-अपने पक्ष को जनता के सामने रख रहे हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में संसद और राजनीतिक मंचों पर इस मुद्दे को लेकर बहस और तेज होने की संभावना है।
