नई दिल्ली, दिल्ली
भागदौड़ भरी जिंदगी में तनाव, बेचैनी और मानसिक थकान आम अनुभव बनते जा रहे हैं। ऐसे में कई लोग सुकून पाने के लिए चाय की चुस्की, प्रकृति के बीच समय बिताने, अकेले घूमने या अपनों से बातचीत का सहारा लेते हैं। इन सबके बीच संगीत भी मन को हल्का करने का एक आसान माध्यम बनकर उभरा है। सही समय पर सुना गया सही संगीत मूड को बदलने, तनाव कम करने और मन को शांत महसूस कराने में मदद कर सकता है।
संगीत का असर केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं है। धुन, लय और बोल इंसान की भावनाओं से गहरा संबंध रखते हैं। यही वजह है कि अलग-अलग परिस्थितियों के लिए लोग अपनी पसंद की अलग प्लेलिस्ट तैयार करते हैं। सुबह ऊर्जा बढ़ाने वाले गीत, काम के दौरान हल्का संगीत और रात में सुकून देने वाली धुनें अब रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बनती जा रही हैं।
जब गीत बन जाए मन की आवाज
फिल्म ‘गाइड’ का गीत ‘वहां कौन है तेरा, मुसाफिर जाएगा कहां’ इसका एक प्रभावी उदाहरण है। फिल्म में राजू के जीवन के एक कठिन दौर के दौरान यह गीत उसकी मनोदशा को सामने लाता है। गीत के शब्द जीवन की अनिश्चितता, अकेलेपन और कुछ देर ठहरकर सांस लेने की जरूरत का एहसास कराते हैं।
यही संगीत की खासियत है। कई बार कोई गीत ऐसी भावना को शब्द दे देता है जिसे व्यक्ति खुद व्यक्त नहीं कर पाता। किसी को पुराना गीत सुनकर बचपन की याद आ सकती है तो किसी को किसी खास धुन से किसी प्रिय व्यक्ति की याद जुड़ी हो सकती है।
प्लेलिस्ट क्यों बदल देती है मूड?
संगीत सुनते समय हमारा मस्तिष्क ध्वनि, लय और शब्दों को संसाधित करता है। पसंदीदा संगीत ध्यान को तनाव पैदा करने वाली सोच से कुछ समय के लिए हटाने में मदद कर सकता है। धीमी और शांत धुनें कई लोगों को आराम महसूस करा सकती हैं, जबकि तेज लय वाला संगीत ऊर्जा और उत्साह बढ़ाने में मदद कर सकता है।
हालांकि हर व्यक्ति पर संगीत का असर एक जैसा नहीं होता। जिस गीत से एक व्यक्ति को सुकून मिलता है, वही दूसरे व्यक्ति को परेशान कर सकता है। इसलिए म्यूजिक थेरेपी या संगीत आधारित विश्राम में व्यक्ति की पसंद और परिस्थिति को ध्यान में रखना महत्वपूर्ण होता है।
कब सुनें कौन सा संगीत?
दिन की शुरुआत के लिए हल्का और सकारात्मक संगीत चुना जा सकता है। काम या पढ़ाई के दौरान ऐसे वाद्य संगीत का इस्तेमाल किया जा सकता है जो ध्यान भटकाने के बजाय वातावरण को शांत बनाए। दिनभर की थकान के बाद धीमी धुनें या पसंदीदा पुराने गीत मन को आराम देने का माध्यम बन सकते हैं।
अगर मन बहुत बेचैन हो तो बहुत तेज आवाज में संगीत सुनने के बजाय मध्यम आवाज में शांत संगीत सुनना बेहतर विकल्प हो सकता है। संगीत के साथ कुछ देर गहरी सांस लेना या शांत जगह पर बैठना भी विश्राम के अनुभव को बेहतर बना सकता है।
संगीत इलाज का विकल्प नहीं
संगीत तनाव और भावनात्मक थकान से निपटने में सहायक हो सकता है, लेकिन इसे हर मानसिक या शारीरिक समस्या का इलाज नहीं माना जाना चाहिए। अगर किसी व्यक्ति को लगातार उदासी, अत्यधिक चिंता, नींद की समस्या या रोजमर्रा के काम प्रभावित होने जैसी परेशानी रहती है, तो विशेषज्ञ की सलाह लेना जरूरी है।
दरअसल, संगीत की सबसे बड़ी खूबी यही है कि इसके लिए किसी खास जगह या बड़े इंतजाम की जरूरत नहीं होती। मोबाइल में बनी एक छोटी-सी प्लेलिस्ट भी दिन के बीच कुछ मिनटों का ऐसा ठहराव दे सकती है, जहां व्यक्ति खुद के साथ समय बिता सके। कभी-कभी एक अच्छी धुन सचमुच उस ‘घनी छांव’ की तरह काम कर सकती है, जिसकी तलाश भागती जिंदगी में हर इंसान को रहती है।
