पटना, बिहार। कलेक्टर ने सभी नागरिकों से अपील की है कि वे सरकारी सेवाओं का लाभ लेने के लिए निकटतम ई-सेवा केंद्र का ही उपयोग करें ताकि समय और धन की अनावश्यक बर्बादी से बचा जा सके। अधिकारियों ने ई-सेवा केंद्रों की कार्यप्रणाली पर सख्त निगरानी रखने का निर्देश दिया है ताकि कोई भी केंद्र गलत तरीके से अधिक शुल्क वसूल न करे या सेवा में त्रुटि न हो।
कलेक्टर कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार, कोरोना महामारी के दौरान डिजिटल सेवाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही है। सरकार ने ई-सेवा केंद्रों के माध्यम से अनेक योजनाओं को आम जनता तक पहुंचाने का प्रयास किया है। लेकिन कुछ स्थानों पर शिकायतें मिली हैं कि कुछ केंद्र समय सीमा पार करने, गलत दस्तावेज मांगने या सरकारी दर से अधिक शुल्क वसूलने का प्रयास कर रहे हैं।
इस संदर्भ में कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि ई-सेवा केंद्रों को सिर्फ सरकारी निर्धारित शुल्क ही लेना होगा। किसी भी अतिरिक्त शुल्क के मामले में तुरंत सूचना दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि केंद्रों का उद्देश्य जनता को सुविधाजनक, त्वरित और पारदर्शी सेवाएं प्रदान करना है, न कि उन्हें परेशान करना।
कलेक्टर ने जनता से यह भी कहा कि यदि उन्हें किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी, अतिरिक्त चार्ज या सेवा में समस्या का सामना करना पड़े तो वे तत्काल संबंधित अधिकारियों से संपर्क करें। जिला प्रशासन द्वारा इस मामले की जांच पूरी गंभीरता से की जाएगी और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
अधिकारियों ने जनता को यह भी निर्देश दिया है कि वे ई-सेवा केंद्रों के कामकाज और उनके शुल्क की जानकारी पहले से प्राप्त कर लें। इसके लिए जिला प्रशासन की आधिकारिक वेबसाइट और हेल्पलाइन नंबर उपलब्ध हैं, जिनका उपयोग करके वे अपनी शंका दूर कर सकते हैं।
इस तरह के कदम स्थानीय प्रशासन द्वारा सरकारी सेवाओं को और अधिक पारदर्शी, प्रभावी और जनता के अनुकूल बनाने के प्रयासों का हिस्सा हैं। नागरिकों को भी इस अभियान में सहभागी बनना होगा ताकि भ्रष्टाचार और अवैध शुल्क वसूलने जैसी घटनाओं पर अंकुश लगाया जा सके।
अंत में, कलेक्टर ने जोर देकर कहा कि सरकारी सेवाएं सभी के लिए हैं और ई-सेवा केंद्रों का उद्देश्य इन्हें सरल और सुलभ बनाना है। इसलिए, बेहतर जानकारी और जागरूकता के साथ ही इन केंद्रों का सही ढंग से उपयोग किया जाना चाहिए।
