सैन फ्रांसिस्को, कैलिफोर्निया: टेक्नोलॉजी जगत में बढ़ते विवाद के बीच, सैन फ्रांसिस्को के अधिकारियों ने गूगल और एप्पल से आग्रह किया है कि वे अपनी ऐप स्टोर्स से AI आधारित ‘न्यूडिफिकेशन’ ऐप्स को हटाएं। यह मांग ऐसे ऐप्स को लेकर की गई है जो उपयोगकर्ताओं की सहमति या सही सुरक्षा उपायों के बिना नकली नग्न तस्वीरें उत्पन्न करते हैं।
हाल ही में यह विषय व्यापक चर्चा में आया जब कुछ रिपोर्टों में बताया गया कि ये ऐप्स गोपनीयता और नैतिकता दोनों के लिहाज से चिंताजनक हैं। शहर के अधिकारियों ने इस प्रकार के ऐप्स के उपयोग से होने वाले संभावित दुरुपयोग और मानसिक दबाव को लेकर गहरा आशंका व्यक्त की है।
एप्पल और गूगल दोनों कंपनियों ने इस दिशा में अपने नियमों के उल्लंघन पर पुनः अपनी कठोर प्रतिक्रिया दी है। दोनों कंपनियों ने कहा कि उन्होंने नियमों का उल्लंघन करने वाले ऐप्स के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की है और भविष्य में भी ऐसी गतिविधियों को रोकने के लिये तत्पर रहेंगे।
टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में तेजी से बढ़ती AI क्षमताओं के बावजूद, विशेषज्ञ और नीति निर्माता इस बात पर जोर दे रहे हैं कि इन तकनीकों का उपयोग नैतिकता की चौखट के भीतर ही होना चाहिए। यूजर्स की प्राइवेसी और सम्मान की रक्षा के लिए कड़े नियम आवश्यक हैं।
सैन फ्रांसिस्को के अधिकारी यह भी मानते हैं कि डिजिटल प्लेटफार्मों के पास यह जिम्मेदारी है कि वे उन ऐप्स पर करीनी निगरानी रखें जो संवेदनशील सामग्री उत्पन्न कर सकते हैं। शहर के एक प्रवक्ता ने बताया कि वे इस मुद्दे को लेकर तकनीकी कंपनियों के साथ निरंतर चर्चा में हैं ताकि एक सुरक्षित ऑनलाइन माहौल बनाया जा सके।
विशेषज्ञों के अनुसार, AI आधारित यह न्यूडिफिकेशन ऐप्स न केवल व्यक्तिगत गोपनीयता का उल्लंघन करते हैं, बल्कि इसका दुरुपयोग कर मानसिक उत्पीड़न और छेड़छाड़ की घटनाओं को भी बढ़ावा मिल सकता है। इसलिए यह आवश्यक है कि ऐसे ऐप्स को तत्काल प्रभाव से हटा दिया जाए और संबंधित तकनीकी मानकों को कड़ाई से लागू किया जाए।
इस दिशा में गूगल और एप्पल द्वारा उठाए गए कदम स्वागत योग्य हैं, मगर सामाजिक और कानूनी स्तर पर भी ऐसे दुरुपयोग रोकने के लिए सख्त नियम बनाए जाने की जरूरत जताई जा रही है। उपयोगकर्ताओं के लिए सुरक्षित और भरोसेमंद डिजिटल सेवा सुनिश्चित करना हर टेक कंपनी की प्राथमिकता होनी चाहिए।
