मोगा, पंजाब। शिरोमणि अकाली दल (एसएडी) के वाइस प्रेसिडेंट संजीत सिंह सनी गिल ने हाल ही में कुरुक्षेत्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा सिख म्यूजियम की स्थापना को लेकर अपनी कृतज्ञता व्यक्त की है। उन्होंने इस संग्रहालय को सिख समुदाय के इतिहास, बलिदान और सामाजिक योगदान को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने में एक महत्वपूर्ण पहल बताया।
संजीत सिंह सनी गिल ने प्रधानमंत्री मोदी का धन्यवाद करते हुए कहा कि यह संग्रहालय न केवल सिख समाज के लिए गर्व का विषय है, बल्कि यह पूरे देश को एक प्रेरणा देगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि सिख गुरुओं और समुदाय ने हमेशा देश की रक्षा और सामाजिक सेवा में अग्रणी भूमिका निभाई है, और अब यह आवश्यक है कि यह विरासत युवा पीढ़ी तक प्रभावी रूप से पहुंचाई जाए।
इसके साथ ही उन्होंने प्रधानमंत्री से कई महत्वपूर्ण मांगें भी कीं। सबसे पहली मांग करतारपुर कॉरिडोर को पुनः खोलने की रही। उन्होंने बताया कि पाकिस्तान स्थित करतारपुर साहिब की यात्रा बंद होने से हजारों सिख श्रद्धालु अपनी धार्मिक यात्राओं से वंचित हो रहे हैं, जो उनकी आस्था और भावनाओं को प्रभावित कर रहा है। कॉरिडोर के बंद होने से संबंधित अधिकारियों को शीघ्र इसे पुनः संचालित करना चाहिए ताकि श्रद्धालु अपने पवित्र स्थल का दर्शन कर सकें।
सनी गिल ने सजा पूरी कर चुके बंदी सिखों की रिहाई की भी मांग की। उनका कहना था कि जो सिख कैदी अपनी सजा पूरी कर चुके हैं, उन्हें कानून द्वारा रिहा होना चाहिए और सरकार को इस दिशा में कदम उठाना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि यदि प्रधानमंत्री पंजाब दौरे के दौरान बंदी सिखों की रिहाई का ऐलान करते हैं तो इससे पंजाब की जनता की भावनाओं को सम्मान मिलेगा और लंबे समय से चली आ रही परेशानियां कम होंगी।
अतिरिक्त रूप से, उन्होंने पंजाब की आर्थिक स्थिति को लेकर भी चिंता प्रकट की। उन्होंने बताया कि आतंकवाद के दौर में पंजाब ने बहुत भारी कर्ज लिया था, जो अब बढ़ते ब्याज और वित्तीय दबाव के कारण बढ़ चुका है। क्योंकि आतंकवाद का असर केवल पंजाब तक सीमित नहीं था, बल्कि यह पूरे देश की सुरक्षा से जुड़ा मसला था, उन्होंने प्रधानमंत्री से अपील की कि इस विशेष संदर्भ को ध्यान में रखते हुए पंजाब के कर्ज माफी पर विचार किया जाना चाहिए। इससे राज्य की आर्थिक मजबूती बढ़ेगी और विकास कार्यों को बढ़ावा मिलेगा।
सनी गिल के अनुसार, यह प्रयास न केवल सिख समुदाय की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को सम्मान देगा बल्कि पंजाब के सामाजिक, आर्थिक एवं विकासात्मक पक्षों को भी मजबूती प्रदान करेगा। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि वे इन मुद्दों पर गंभीरता से विचार करें ताकि प्रदेश और देश दोनों के हित में सकारात्मक परिणाम प्राप्त हो सकें।
