धर्मपुरी, तमिलनाडु। तमिलनाडु में बंगाल लोमड़ी की दुर्लभ प्रजाति अब केवल कुछ सीमित क्षेत्रों में ही देखी जा सकती है। वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार यह लोमड़ी अपनी विशिष्ट एक पतिदेवता (Monogamous) व्यवहार के लिए जानी जाती है। वर्तमान में ये प्रजाति मुख्यतः धर्मपुरी, तिरुवन्नमलाई, सलेम, मदुरै और विल्लूपुरम के जंगलों में ही पाई जाती है।
बंगाल लोमड़ी की संख्या में लगातार गिरावट देखी जा रही है, जिससे इनके संरक्षण की आवश्यकता और भी गंभीर हो गई है। वन विभाग ने इस प्रजाति के लिए विशेष क्षेत्रों की पहचान कर संरक्षण प्रयास तेज कर दिए हैं। लोमड़ी का प्राकृतिक आवास लगातार घट रहा है, विशेषकर मानवीय गतिविधियों के कारण जैसे कि जंगलों की कटाई, कृषि विस्तार और बस्तियों का फैलाव।
वन विभाग के अधिकारी बताते हैं कि बंगाल लोमड़ी के संरक्षण के लिए समुदायों को भी जागरूक करना आवश्यक है ताकि वे इस प्रजाति और उसके आवास की रक्षा में सहयोग कर सकें। इस लोमड़ी का पारिवारिक व्यवहार उसे अन्य जंगली प्राणियों से अलग बनाता है, और इसलिए इनके संरक्षण से पारिस्थितिकी तंत्र में संतुलन बनाए रखने में मदद मिलती है।
विशेषज्ञ यह मानते हैं कि यदि समय रहते संरक्षण के उपाय न किए गए, तो यह प्रजाति गंभीर संकट में पड़ सकती है। वन विभाग ने स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर इस दिशा में कई पहलें शुरू की हैं, जिनमें जंगलों की पेड़ों की कटाई रोकना, जैव विविधता संरक्षण कार्यक्रम और अवैध गतिविधियों पर कड़ी नजर रखना शामिल है।
वन्यजीव प्रेमी और पर्यावरणविद् भी इस संकट की गंभीरता को लेकर चिंता जताते हुए अधिक जागरूकता फैलाने की वकालत कर रहे हैं। वे कहते हैं कि प्रत्येक प्राणी का अपने पर्यावरण में एक महत्वपूर्ण स्थान होता है, और बंगाल लोमड़ी का धड़कता हुआ निवास स्थान प्रकृति की विविधता का प्रतीक है। समाज के हर तबके को इसके संरक्षण के लिए सक्रिय भूमिका निभानी होगी।
इस प्रकार तमिलनाडु में बंगाल लोमड़ी की संरक्षण कहानी न केवल वन विभाग बल्कि पूरे समाज के प्रयासों से ही संभव है। समय रहते उचित कदम उठाने से ही यह सुंदर और अनोखी प्रजाति सुरक्षित रह सकेगी और अपने प्राकृतिक आवास में सुरक्षित जीवन व्यतीत कर सकेगी।
