बिजयिनी सातपथी की त्रिकाया ने लिंग आधारित शरीर पर सवाल उठाए

मुंबई, महाराष्ट्र – मुंबई के G5A फाउंडेशन फॉर कंटेम्पररी कल्चर में आयोजित इन रेसिडेंसी प्रोग्राम के तहत प्रस्तुत, प्रसिद्ध ओडिसी नृत्यांगना बिजयिनी सातपथी का नवीनतम एकल प्रदर्शन ‘त्रिकाया’ ने महाभारत की तीन घटनाओं के माध्यम से लिंग, पहचान और शास्त्रीय कला के अभिव्यक्तिपूर्ण संभावनाओं को गहराई से जांचा है।

‘त्रिकाया’ एक ऐसा मंचीय प्रदर्शन है जिसने दर्शकों को पारंपरिक नृत्य रूप के भीतर लिंग की सामाजिक संरचनाओं और पहचान की जटिलताओं पर चिंतन करने के लिए प्रेरित किया। इस नृत्य के माध्यम से सातपथी ने न केवल नृत्य की शारीरिक भाषा दिखाई, बल्कि उन्होंने उस भाषा को पुनर्परिभाषित करते हुए महिलाओं और पुरुषों के तयशुदा भेदों पर सवाल उठाए।

बिजयिनी सातपथी ने इस प्रदर्शनी के दौरान टिप्पणी की, “महाभारत की तीन प्रमुख घटनाओं का चयन इस लिए किया गया है क्योंकि ये कथा पारंपरिक लिंगधारणा को चुनौती देती हैं और पात्रों की पहचान में विविधता को उजागर करती हैं। नृत्य का स्वरूप और आलस भी इन्हीं विषयों की व्याख्या करता है।”

G5A फाउंडेशन के निदेशक ने कहा, “त्रिकाया प्रदर्शन न केवल सांस्कृतिक संरक्षण का प्रतिनिधित्व करता है, बल्कि यह सामाजिक विमर्श को प्रोत्साहित करता है, खासकर लिंग के संदर्भ में। यह हमें अपने पूर्वाग्रहों पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर करता है।”

इस कार्यक्रम में मुंबई के कला समीक्षक और दर्शकों ने भी बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया। कई समीक्षकों ने इसे एक साहसिक और नवीन प्रयास बताया जो शास्त्रीय कला में नए प्रश्न उठाता है और दर्शकों को सोचने पर मजबूर करता है।

बिजयिनी सातपथी का यह प्रस्तुतीकरण ऐसे समय में आया है जब भारत में लिंग समानता और पहचान के मुद्दे समाज में चर्चा का विषय बने हुए हैं। इस प्रकार के सांस्कृतिक आयोजन सामाजिक जागरूकता बढ़ाने और लिंग आधारित पूर्वाग्रहों को चुनौती देने में मदद करते हैं।

त्रिकाया प्रदर्शनी आगामी कुछ सप्ताह तक मुंबई में निरंतर जारी रहेगी और कला प्रेमियों के लिए एक अनूठा अनुभव प्रदान करेगी।

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