चेन्नई प्राइड में LGBTQIA समुदाय ने नए संशोधन अधिनियम के खिलाफ आवाज उठाई

चेन्नई, तमिलनाडु – लाखों लोगों के साथ-साथ भारतीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के कई समर्थक चेन्नई प्राइड मार्च में शामिल होकर LGBTQIA समुदाय के अधिकारों की सुरक्षा के लिए अपनी आवाज़ बुलंद की। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य हाल ही में प्रस्तावित नए संशोधन अधिनियम के खिलाफ विरोध जताना था, जिसे समुदाय और उनके समर्थक न्यायसंगत नहीं मानते।

प्राइड मार्च का आयोजन चेन्नई के प्रमुख क्षेत्रों में किया गया, जहाँ हजारों लोग रंग-बिरंगे बैनर लेकर, नारे लगाते हुए एकजुट हुए। चेन्नई पुलिस ने भी इस आयोजन को सुचारु रूप से चलाने में सहयोग दिया। आयोजकों ने बताया कि यह मार्च केवल एक विरोध प्रदर्शनी नहीं, बल्कि प्यार, समानता और मानवीय अधिकारों की मांग का प्रतीक था।

विशेष रूप से, इस बार की सुदृढ़ भागीदारी ने यह संकेत दिया कि न केवल चेन्नई के लोग बल्कि कई अन्य देशों के लोग भी इस अधिनियम के खिलाफ एकजुट हुए हैं। वायरल सोशल मीडिया पोस्ट्स और लाइव स्ट्रीमिंग के माध्यम से विश्व के विभिन्न हिस्सों से समर्थक सजीव रूप में इस मार्च का हिस्सा बने।

समाज कार्यकर्ता और मानवाधिकार विशेषज्ञों के अनुसार, यह संशोधन अधिनियम LGBTQIA समुदाय के अधिकारों और उनके संरक्षण में अनेक अड़चनें पैदा कर सकता है। उन्होंने सरकार से अनुरोध किया है कि वह इस विषय पर पुनर्विचार करे और समुदाय की भावना का सम्मान करे।

इस बीच, मार्च के दौरान कई भाषण और सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ भी हुईं, जिनमें विभिन्न भाषाओं और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि के प्रतिभागियों ने भाग लेकर विविधता और समावेशिता का संदेश दिया। सामाजिक संगठनों ने इस आंदोलन को और मजबूत करने का संकल्प लिया है, ताकि LGBTQIA समुदाय के अधिकार सुनिश्चित हो सकें।

इस प्राइड मार्च ने न केवल तमिलनाडु में बल्कि पूरे देश में एक महत्वपूर्ण संदेश दिया है कि समानता और सम्मान की लड़ाई जारी है और इस संघर्ष में सभी को साथ आना होगा।

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