किन्नौर, हिमाचल प्रदेश। किन्नौर कैलाश यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए दुखद समाचार है। जिला प्रशासन ने सुरक्षा कारणों के चलते किन्नौर कैलाश यात्रा-2026 को अगले आदेश तक स्थगित कर दिया है। यह यात्रा पहले 1 जुलाई से 30 जुलाई तक आयोजित होने वाली थी। परन्तु, यात्रा मार्ग की सुरक्षा जांच में गंभीर खतरों का पता चलने के कारण यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है।
जिला प्रशासन की ओर से जारी बयान के अनुसार, 12 जून को राजस्व, बागवानी, जनजातीय विकास एवं लोक शिकायत निवारण मंत्री जगत सिंह नेगी की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय बैठक हुई थी, जिसमें यात्रा आयोजित करने के निर्णय पर चर्चा हुई थी। लेकिन बाद में सुरक्षा कारणों को ध्यान में रखते हुए पुनः समीक्षा की गई।
इसके बाद वन विभाग और स्थानीय प्रशासन के सहयोग से एक विशेष सर्वेक्षण दल का गठन किया गया, जिसने 21 जून को यात्रा मार्ग का निरीक्षण किया। सर्वेक्षण रिपोर्ट में पाया गया कि मिलिंग खाता से शिवलिंग तक के मार्ग पर स्थित बड़े ग्लेशियर और आसपास की अस्थिर चट्टानें खतरनाक स्थिति में हैं। इसके अलावा, गुफा से सोरंग के बीच के कई स्थानों पर बड़े बोल्डर गिरने के कारण रास्ता बाधित हो चुका है। ये चट्टानें एक-दूसरे के सहारे टिकी हैं, जिससे किसी भी समय बड़ा भूस्खलन हो सकता है।
अध्ययन में यह भी कहा गया कि बढ़ते तापमान के कारण बर्फ पिघलने से चट्टानों के खिसकने, मलबा गिरने और भूस्खलन का खतरा और अधिक बढ़ गया है। मिलिंग खाता से पवित्र गुफा तक का मार्ग, जहां श्रद्धालु अधिकांशतः रात के समय यात्रा करते हैं, विशेष रूप से जोखिमपूर्ण पाया गया है।
इन सभी खतरनाक स्थितियों को देखते हुए जिला प्रशासन ने श्रद्धालुओं और बचाव एवं आपदा प्रबंधन दलों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए किन्नौर कैलाश यात्रा-2026 को अगले आदेश तक स्थगित करने का निर्णय लिया है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि तभी यात्रा को पुनः आयोजित किया जाएगा, जब मौसम और मार्ग की सुरक्षा स्थितियां पूरी तरह ठीक हों और यात्रा मार्ग को सुरक्षित घोषित किया जाए।
अधिकारियों ने सभी श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे अगले आदेश तक किन्नौर कैलाश यात्रा पर न जाएं और प्रशासन द्वारा जारी सुरक्षा निर्देशों का पालन करें। प्रशासन ने यह भी कहा कि यात्रियों और स्थानीय लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम लगातार उठाए जा रहे हैं।
यह निर्णय श्रद्धालुओं की सुरक्षा हित में लिया गया है ताकि किसी अनहोनी से बचा जा सके। प्रशासन के इस कदम से यह स्पष्ट होता है कि किसी भी पर्वतीय यात्रा में सुरक्षा को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। श्रद्धालुओं और स्थानीय वासियों से आग्रह है कि वे प्रशासन के निर्देशों का पूरी गंभीरता से पालन करें और मौसम तथा रास्ते की परिस्थिति को समझते हुए ही अपने धार्मिक संकल्प को पूरा करें।
