चंडीगढ़। चंडीगढ़ के सेक्टर-11 स्थित एक केमिस्ट शॉप पर हुई फायरिंग की सनसनीखेज घटना ने शहर की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वार्ड नंबर 13 के पार्षद सचिन गलांव ने प्रशासन और पुलिस व्यवस्था पर कड़ी प्रतिक्रिया जताते हुए कहा कि यह कोई isolated मामला नहीं, बल्कि लगातार बढ़ रही आपराधिक घटनाओं का हिस्सा है जो चिंताजनक है।
पार्षद ने बताया कि दिनदहाड़े व्यस्त बाजार में हुई गोलीबारी से एक निर्दोष व्यक्ति की मौत हो गई, जिसने पूरे शहर को विचलित कर दिया है। प्रारंभिक खबरों में घायल की बात थी, लेकिन बाद में पुष्टि हुई कि पीड़ित की मौके पर ही मौत हो गई। करीब 13 गोलियां चलने से यह साफ है कि हमलावर पूरी तैयारी से आए थे और उन्होंने वारदात को अंजाम देकर फरार हो गए।
गलांव ने बताया कि मृतक हिमाचल प्रदेश का निवासी था और यहां रोज़गार के लिए आया था। एक मेहनतकश परिवार का इकलौता सदस्य होने के नाते वह जीवन यापन कर रहा था, लेकिन इस दुखद घटना ने उसकी जान ले ली। उन्होंने कहा कि मृतक का किसी से दुश्मनी या धमकी का कोई मामला नहीं था, इसलिए यह हमला और भी गंभीर माना जा रहा है।
उन्होंने सवाल उठाए कि प्रारंभिक जांच में मृतक या दुकान मालिक को किसी भी तरह की धमकी नहीं मिली थी। यह मामला सुनियोजित हमला प्रतीत होता है, इसलिए पुलिस एवं प्रशासन को गहन जांच करनी चाहिए ताकि दोषी पकड़े जाएं।
पार्षद ने शहर की मौजूदा सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि चंडीगढ़ को आमतौर पर सुरक्षित माना जाता है, लेकिन हाल में हुई घटनाएं इस धारणा को दुर्बल कर रही हैं। पिछले कुछ महीनों में सेक्टर-9 में हत्या, सेक्टर-37 में ग्रेनेड हमला और अन्य अपराध बढ़ते जा रहे हैं, जो चिंता का विषय है।
वार्ड के कई निवासियों ने घटना के बाद अपनी सुरक्षा को लेकर चिंता जाहिर की। वे पूछ रहे हैं कि अगर व्यस्त इलाके में इस तरह की वारदात होती है, तो आम नागरिक सुरक्षित कैसे रहेंगे। पार्षद ने कहा कि केवल पुलिसकर्मियों की तैनाती से काम नहीं चलेगा, बल्कि व्यापक रणनीतिक सुधार की आवश्यकता है।
उन्होंने यह भी सवाल उठाए कि जिस जगह घटना हुई, वहां से कुछ दूरी पर पुलिस बूथ, थाना और अन्य सुरक्षा संस्थान होने के बावजूद अपराधी आसानी से फरार हो गए। यह सुरक्षा व्यवस्था की बड़ी चूक को दर्शाता है। सीसीटीवी, ट्रैफिक लाइट्स और निगरानी प्रणाली उपस्थित होने के बावजूद अपराधी पकड़ में न आना गंभीर चिंता है।
गलांव ने कहा कि इतनी कड़ी सुरक्षा व्यवस्था वाले शहर में भी अपराधी बेखौफ होकर वारदात कर सके, यह सिस्टम की विफलता है। प्रशासन को इसके कारणों की समीक्षा करनी चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि अक्सर ऐसी घटनाओं के बाद पुलिस कार्रवाई तेज होती है तथा कुछ समय बाद मुठभेड़ या गिरफ्तारियों की खबरें आती हैं, लेकिन मूल समस्याएं जस की तस बनी रहती हैं। केवल तात्कालिक कार्रवाई से काम नहीं चल पाएगा, स्थायी और सख्त रणनीति अपनानी होगी ताकि अपराधियों पर लगाम लग सके।
