चंडीगढ़, हरियाणा। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने में जन-भागीदारी और लोकतांत्रिक संस्थाओं की भूमिका को बेहद अहम बताया। उन्होंने कहा कि विधायिकाओं का कार्य केवल कानून निर्माण तक सीमित नहीं है बल्कि समाज के प्रत्येक अंतिम नागरिक के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने की भी जिम्मेदारी इन्हें निभानी होती है।
कॉमनवेल्थ पार्लियामेंट्री एसोसिएशन इंडिया रीजन जोन-दो (उत्तर क्षेत्र) के सम्मेलन के उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए ओम बिरला ने हरियाणा को नैतिक चेतना और कर्तव्यबोध की भूमि के रूप में वर्णित किया। उन्होंने कहा कि देश के सभी राज्यों को मिलकर विकसित बनाने और विकसित भारत के संकल्प को साकार करने के लिए एकजुट होकर काम करना होगा। इस उद्देश्य से विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधि इस सम्मेलन में एकत्र हुए हैं।
ओम बिरला ने यह भी कहा कि भारत ने अपने मजबूत लोकतंत्र की शक्ति द्वारा सामाजिक और आर्थिक क्षेत्रों में नई दिशा स्थापित की है। देश लगातार विकास की ओर अग्रसर है, जिससे समाज के विभिन्न वर्गों को लाभ मिल रहा है। उन्होंने बल देते हुए कहा कि जनप्रतिनिधि अपने-अपने क्षेत्रों में विकास और सकारात्मक बदलाव लाने के सशक्त माध्यम हैं, इसलिए उनकी भूमिका और जिम्मेदारी अत्यंत महत्वपूर्ण है।
लोकसभा अध्यक्ष ने वर्तमान वैश्विक अस्थिरता के बीच भारत की स्थिर और मजबूत शासन व्यवस्था पर गर्व जताया। उन्होंने युवाओं को भारत की सबसे बड़ी ताकत बताते हुए कौशल विकास पर विशेष ध्यान देने का आग्रह किया, जिससे युवा देश के आर्थिक और सामाजिक विकास में प्रभावी योगदान दे सकें।
ओम बिरला ने लोकतांत्रिक व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाने के लिए जन-भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया। इसके लिए विधायिकाओं में सार्थक चर्चा, संवाद और विचार-विमर्श की संस्कृति को बढ़ावा देना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि बेहतर नीतियां और कानून बनाने के लिए आम जनता की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करनी होगी।
अंत में उन्होंने आशा व्यक्त की कि दो दिवसीय इस सम्मेलन में जन-भागीदारी के मुद्दे, लोकतांत्रिक संस्थाओं को सुदृढ़ करने, और विकसित भारत के लक्ष्य को आगे बढ़ाने पर गंभीर और सार्थक चर्चा होगी। सभी प्रतिनिधि मिलकर सामूहिक संकल्प के साथ इस दिशा में निर्णायक कदम उठाएंगे।
