परिवारों को पोषण आपूर्ति सुधारने के लिए फोर्टिफाइड चावल अपनाने की सलाह

नई दिल्ली, भारत – परिवारों को पोषण की कमी दूर करने और बेहतर स्वास्थ्य सुनिश्चित करने के लिए फोर्टिफाइड चावल को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि फोर्टिफाइड चावल, जिसमें आवश्यक विटामिन और खनिज शामिल होते हैं, विशेष रूप से बच्चों और महिलाओं के लिए पोषण संबंधी समस्याओं को कम करने में मददगार साबित हो सकता है।

फोर्टिफाइड चावल में जोड़ने वाली पोषक तत्व, जैसे आयरन, फोलिक एसिड, जिंक और विटामिन B12, शरीर की विभिन्न आवश्यकताओं को पूरा करते हैं। भारत में मैलन्यूट्रिशन की समस्या गम्भीर होती जा रही है, जिससे डब्ल्यूएचओ के अनुसार लगभग 40% बच्चों में पोषण संबंधी कमी देखी जाती है। ऐसे में फोर्टिफाइड चावल का उत्पादन और उपयोग बढ़ाने की पहल राष्ट्रीय स्तर पर उठाई जा रही है।

सरकारी एजेंसियों और गैर-सरकारी संगठनों ने मिलकर इसके प्रचार-प्रसार का कार्य शुरू किया है। वे ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में लोगों को जागरूक करने के लिए विभिन्न कार्यक्रम संचालित कर रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि फोर्टिफाइड चावल का नियमित सेवन न केवल रक्ताल्पता जैसी बीमारियों को कम कर सकता है, बल्कि समग्र बाल विकास और रोगप्रतिरोधक क्षमता को भी बेहतर बनाता है।

इसके अलावा, स्वास्थ्य मंत्रालय ने फोर्टिफाइड चावल को सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) में शामिल करने के लिए भी अनुशंसाएं दी हैं, जिससे कम आय वाले परिवारों तक पोषणयुक्त खाद्य सामग्री पहुंचाई जा सकेगी। इस पहल से पोषण सुरक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

आधुनिक शोध संस्थान भी फोर्टिफाइड चावल के चिकित्सीय प्रभावों पर अनुसंधान कर रहे हैं और इसके दीर्घकालिक लाभों के लिए साक्ष्य जुटा रहे हैं। अभी कई राज्यों में इसे कई सरकारी स्कूलों और मातृत्व भत्ते केंद्रों में आपूर्ति की जा रही है, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि सबसे ज़रूरतमंद लोगों तक पोषण पहुंच सके।

फोर्टिफाइड चावल को अपनाने के लिए परिवारों का सहयोग महत्वपूर्ण है, क्योंकि स्वस्थ पोषण एक बेहतर जीवन की नींव है। इस दिशा में सरकार, विशेषज्ञों और आम जनता के संयुक्त प्रयास से भारत में पोषण सुरक्षा को नई ऊँचाईयां मिलने की उम्मीद है।

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